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सोमवार, 07 अगस्त, 2006 को 02:28 GMT तक के समाचार

इसराइली हमले में '40 लोगों की मौत'

लेबनान के प्रधानमंत्री ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान के एक गाँव पर हुई इसराइली हवाई हमले में चालीस से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

फ़ुयाद सिनोरा ने बेरुत में अरब देशों के विदेश मंत्रियों की एक बैठक में कहा कि दक्षिणी लेबनान में भयानक जनसंहार हुआ है.

लेबनान के प्रधानमंत्री का बयान लेबनान पर सोमवार सुबह से हुए इसराइली हमलों के बाद आया है. रविवार को इसराइल में हिज़्बुल्ला के हमलों में 15 लोग मारे गए थे.

इसराइल ने लेबनान पर सोमवार को भी हवाई और ज़मीनी हमले किए हैं. दूसरी ओर राजनयिक संघर्ष विराम की कोशिशों में जुटे हुए हैं.

इसके अलावा इसराइली सेना और हिज़्बुल्ला लड़ाकों के बीच ज़मीनी संघर्ष भी जारी है.

संघर्ष विराम की कोशिशों के तहत संयुक्त राष्ट्र में राजनयिक सोमवार को एक बार फिर जुटेंगे. अरब देशों के मंत्री भी संघर्ष विराम के लिए बेरूत में बैठक कर रहे हैं.

कूटनीतिक कोशिशें

दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र में इस संघर्ष पर समझौते के मसौदे पर चर्चा चल रही है. इसमें हिज़्बुल्ला से तत्काल हमले बंद करने और इसराइल से सैन्य अभियान समाप्त करने को कहा गया है.

हालांकि लेबनान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कहा है कि वह प्रस्तावित मसौदे को संशोधित करे.

इधर इसराइल ने दावा किया है कि उसने हिज़्बुल्ला के उस ठिकाने को नष्ट कर दिया है जहाँ से रॉकेट दाग़े जा रहे थे.

इसराइल का कहना है कि ये रॉकेट क़ाना से दाग़े जा रहे थे.यह वही जगह है जहाँ दो दिन पहले इसराइली हमले में 28 लेबनानी मारे गए थे.

इसके जवाब में इसराइली सेना ने हवाई हमले किए गए हैं और उन दक्षिणी लेबनान के उन हिस्सों पर हमले तेज़ किए हैं जिसे हिज़्बुल्ला का गढ़ माना जाता है.

प्रस्ताव में संशोधन

इस बीच लेबनान ने युद्धविराम प्रस्ताव के मसौदे में कुछ बदलाव के लिए औपचारिक अनुरोध किया है.

इस संशोधित प्रस्ताव में लेबनानी इलाक़े से इसराइली सेना के हटने को कहा गया है.

इसराइल का कहना है कि वह हिज़्बुल्ला पर तब तक हमले जारी रखेगा जब तक युद्धविराम पर प्रस्ताव क्रियान्वन में नहीं आ जाता जिसमें इसराइल के मुताबिक हफ़्तों लग सकते हैं.

जबकि हिज़्बुल्ला ने कहा है कि वह तब तक लड़ता रहेगा जब तक लेबनानी क्षेत्र से आख़िरी इसराइली सैनिक नहीं चला जाता.

ग़ौरतलब है कि लेबनान में युद्धविराम के प्रस्ताव पर अमरीका और फ़्रांस के बीच मतभेद थे जो लंबे प्रयासों के बाद दूर हो गए हैं.

अब इस पर सुरक्षा परिषद के देश विचार कर रहे हैं और कूटनयिकों का कहना है कि इस पर मंगलवार को मतदान होने की संभावना है.