http://www.bbcchindi.com

शुक्रवार, 21 जुलाई, 2006 को 03:20 GMT तक के समाचार

हिज़्बुल्ला झुकने को तैयार नहीं

लेबनान के हिज़्बुल्ला नेता इसराइल के दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे दो इसराइली सैनिकों को बंधकों की अदला-बदली में ही छोड़ेंगे.

हिज़्बुल्ला नेता हसन नसरल्ला ने अरबी टीवी चैनल अल जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि इसराइली हमले हिज़्बुल्ला की ताक़त को नुक़सान नहीं पहुँचा पाए हैं.

इसराइल ने कहा है कि उसने एक ऐसे बंकर पर बमबारी की है जिसे हिज़्बुल्ला नेता नसरल्ला इस्तेमाल करते थे और इस संगठन की मिसाइलों को नष्ट कर दिया है.

ग़ौरतलब है कि लेबनान में हिज़्बुल्ला समानान्तर सरकार की तरह है और उसकी सैनिक ताक़त लेबनान की राष्ट्रीय सेना से कहीं ज़्यादा है.

दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच तुरंत युद्ध विराम होना चाहिए ताकि लोगों की जानें बचाई जा सकें और वहाँ सहायता पहुँच सके.

लेकिन अमरीका और इसराइल ने तुरंत युद्ध विराम पर अपनी आपत्तियाँ दोहराई हैं.

इसराइल के हमलों में अब तक कम से कम 306 लोग मारे गए हैं और पाँच लाख लोग विस्थापित हुए हैं.

दूसरी ओर हिज़्बुल्ला के हमलों में 31 इसराइली मारे गए हैं जिसमें 15 आम नागरिक शामिल हैं.

इस बीच इसराइली सैनिकों और हिज़्बुल्ला के लड़ाकों के बीच भीषण लड़ाई जारी है और संकेत मिल रहे हैं कि इसमें तेज़ी आ सकती है.

उधर विदेशी नागरिकों को लेबनान से निकाले जाने का कार्य पूरी गति से चल रहा है और अब तक कोई दस हज़ार विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है.

अन्नान की अपील

मध्यपूर्व जा रहे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों को संबोधित करते हुए महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि वे युद्ध विराम चाहते हैं.

लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि तुरंत युद्ध विराम संभव नहीं है क्योंकि इसमें कुछ बाधाएँ हैं. और ये बाधाएँ हैं अमरीका और इसराइल, जिन्हें युद्ध विराम पर आपत्तियाँ हैं.

संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बॉल्टन ने कहा है कि यह कोई नहीं समझा रहा है किसी चरमपंथी संगठन के साथ युद्द विराम समझौता किस तरह लागू किया जा सकता है.

इसी तरह से इसराइल के राजदूत डैन जिलरमैन ने कहा है कि युद्ध विराम पर किसी भी चर्चा से पहले 'आंतक' को रोका जाना चाहिए.

कोफ़ी अन्नान ने जहाँ हिज़्बुल्ला को हिंसा की शुरुआत के लिए दोषी ठहराया है लेकिन साथ ही कहा है कि इसराइल सेना अत्यधिक शाक्ति का उपयोग कर रही है.

उनका कहना था कि कोई पाँच लाख लोग इस हिंसा से प्रभावित हैं और अब उन्हें मानवीय सहायता की ज़रुरत है.