मंगलवार, 18 जुलाई, 2006 को 03:53 GMT तक के समाचार
आतंकवाद पर भारत की चिंताओं से सहमति जताते हुए अमरीका और कई अन्य देशों ने आतंकवाद के ख़िलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को और तेज़ करने की प्रतिबद्धता ज़ाहिर की.
सेंट पीटर्सबर्ग में समूह आठ के नेताओं के साथ मुलाक़ात के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपील की थी कि आतंकवाद के ख़िलाफ स्पष्ट और कड़ा बयान जारी किया जाए.
जी आठ के साथ साथ सम्मेलन में विशेष तौर पर बुलाए गए चार अन्य देशों ( ब्राजील, चीन, कांगो और मेक्सिको) ने भी आतंकवाद के खिलाफ अपना समर्थन जताया.
इन सभी देशों का कहना था कि आंतकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों और इन्हें समर्थन देने वाले देशों के ख़िलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए.
आतंकवाद के ख़िलाफ जारी एक अलग घोषणापत्र में समहू आठ के देशों ( अमरीका, रुस, जापान, ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी और कनाडा) ने कहा कि वैश्विक आतंकवाद के ख़िलाफ वैश्विक प्रतिक्रिया होनी चाहिए.
इन नेताओं ने आतंकवाद से लोहा लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद निरोधक प्रयासों को और मजबूत करने पर भी ज़ोर दिया.
इस बयान पर समूह आठ देशों के नेताओं के अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान ने भी हस्ताक्षर किए.
घोषणापत्र में कहा गया है कि सभी देश आतंकवाद के ख़िलाफ प्रयासों को तेज़ करने के भारत के रुस से सहमत हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थायित्व आ सके.
कूटनीतिक हलकों में यह बयान भारत की कूटनीतिक जीत माना जा रहा है लेकिन आलोचकों का कहना है कि बयान कूटनीति मात्र है क्योंकि इसमें पाकिस्तान का नाम नहीं है.
हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि अधिकतर देश जानते हैं कि आतंकवादी गतिविधियों के लिए भारत किस देश को ज़िम्मेदार ठहराता रहा है और इसके बावजूद इस घोषणापत्र पर चीन का हस्ताक्षर करना महत्वपूर्ण है.
समूह आठ के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया था कि वह बैठक में आतंकवाद का मुद्दा ज़ोर शोर से उठाएंगे और सोमवार को दुनिया भर के विभिन्न नेताओ के साथ अपनी द्विपक्षीय मुलाक़ात के उन्होंने अपनी बात रखी.