रविवार, 16 जुलाई, 2006 को 10:18 GMT तक के समाचार
उर्मिला शेखावत
बीबीसी संवाददाता, लंदन
बाबा रामदेव भारत में लाखों करोड़ों लोगों के जन मानस पर इस क़दर छाए हुए हैं कि नेताओं अभिनेताओं या क्रिकेटरों से उनकी लोकप्रियता कम नहीं.
अब उनकी लोकप्रियता देश में ही नहीं विदेशों में जा पहुँची है.
योग से असाध्य रोगों के इलाज का दावा करने वाले बाबा रामदेव के भारत भर में तो योग शिविर चलते ही हैं लेकिन अब उन्होंने रुख़ किया है ब्रिटेन की ओर, जहाँ पहले से ही उनके कई अनुयायी हैं.
उनकी लोकप्रियता का आलम ये है कि लंदन पहुँचने पर ब्रिटन की महारानी एलिज़ाबेथ ने भी उन्हें विशेष अतिथि के तौर पर चाय की दावत पर बुलाया. साथ ही स्टील किंग कहे जाने भारतीय मूल के लक्ष्मीनिवास मित्तल से भी उनकी मुलाक़ात हुई.
उनका ब्रिटेन के कई शहरों में योग शिविर लगाने का कार्यक्रम है. अपने ब्रिटेन दौरे के क्रम में बाबा रामदेव बीबीसी के बुश हाउस स्टूडियो में भी पहुँचे.
चिकित्सा विज्ञान के सामने बड़ी-बड़ी चुनौतियाँ रखने वाले बाबा रामदेव से बातचीत के महत्वपूर्ण अंश.
आप योगी न होते तो क्या होते?
मुझे किसी ने योगी नहीं बनाया. मुझे ईश्वर ने ये रास्ता दिखाया है. योगी, मैं भाग कर नहीं, जाग कर बना हूँ.
मैंने संन्यास इसलिए धारण नहीं किया कि मुझे पलायन करना था बल्कि इसलिए कि मुझे देश के लिए कुछ विशेष करना है. मैं भगवे कपड़े ज़रूर पहनता हूँ लेकिन मैं रहता हूँ आम इंसानों की तरह.
भारत में योग क्रांति का तो आपने बिगुल बजा ही दिया है, यहाँ ब्रिटेन में योग की ज्वाला जगाने के बारे में आप कितने आश्वस्त हैं.
मैं योग को जीवन शैली, दर्शन और आध्यात्म विज्ञान के अलावा एक संपूर्ण चिकित्सा पद्धति भी मानता हूँ.
भारत में लाखों-करोड़ों लोग इस योग चिकित्सा से फ़ायदा उठा रहे हैं, पश्चिमी देशों में जिन लोगो को मेरे इस दावे पर शंका हो वो आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर मेरी इस धारणा को परख ले.
प्राणायाम से चिकित्सा का वैज्ञानिक आधार क्या है?
मैंने जिन लोगो को प्राणायाम सिखाया, उन्हें शरार के लिए ज़रूरी रसायन नमक वगैरह बाहर से लेने की ज़रूरत नहीं पड़ी.
प्राणायाम से सभी आवश्यक तत्व उनके शरीर में वैसे ही बनने लगे. लोगों पर ये प्रयोग किए गए हैं और उन्हें रोगों से छुटकारा मिला है.
योग से असाध्य रोगों के इलाज का लोगों का ये विश्वास कहीं अंधविश्वास तो नहीं बनता जा रहा.
देखिए, मेरे पास कुछ ऐसे मामले हैं, जहाँ योग चिकित्सा से एड्स और एचआईवी वायरस से ग्रस्त रोगियों को फ़ायदा मिला है. कैंसर के भी ऐसे कई मामले हैं जिनमे मरीज़ो को फ़ायदा मिला है.
क्या कुछ ऐसी बीमारियाँ भी हैं जिनका योग से इलाज नहीं हो सकता, योग की सीमाएँ क्या हैं?
कुछ ऐसे रोग हैं जो फ़िलहाल योग से ठीक नहीं की जा सकती लेकिन उस दिशा में हमारा काम चल रहा है, जैसे स्क्रित्सोफ़ेर्निया और मल्टीपल स्किरोसेज़ वग़ैरह.
आप एक योगी होने के साथ-साथ एक सेलिब्रिटी भी बन गए हैं. क्या आपको कभी ये नहीं लगता कि आप जनता से दूर और नेताओं के ज़्यादा क़रीब आ गये हैं?
जहाँ तक मेरा लोगों से मिलने का सवाल है मैं आज भी उनसे मिलता हूँ और अगर मैं नेताओं या विशिष्ट व्यक्तियों से मिलता हूँ. तो इसीलिए कि मैं आम आदमी के लिए कुछ कर सकूँ.
आप जानती ही हैं कि साधन, संपत्ति, इन्फ़्रास्ट्रक्चर- ये सब खड़ा करने के लिए सहयोग तो विशिष्ट व्यक्तियों से ही मिलता है.
आप अपने शिविरों में योगाभ्यास के दौरान जिस तरह से जंक फूड और सॉफ़्ट ड्रिंक्स के ख़िलाफ़ टिप्पणी करते हैं और जिस तरह बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विरोध करते हैं, कहीं राजनीति में शामिल होने का इरादा तो नहीं.
जंक फूड और सॉफ़्ट ड्रिंक्स के विरोध का संबंध किसी भी तरह राजनीति से नहीं जोड़ा जा सकता. जो खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ लोगों को ज़िंदगी देने के बजाए मौत देते हैं मैं उनका विरोध करता हूँ.
जहाँ तक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विरोध की बात है, उसके पीछे न तो मेरा कोई स्वार्थ है और न ही अज्ञान.
इसके अलावा राजनीति की जहाँ तक बात है न मेरा कोई राजनीतिक अतीत है और न वर्तमान और भविष्य में भी मेरा राजनीति से संबंध नहीं रहेगा.