शनिवार, 15 जुलाई, 2006 को 09:02 GMT तक के समाचार
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने जी8 बैठक से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शनिवार को बैठक करके कई अहम मसलों पर बातचीत की है.
दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने सेंट पीटर्सबर्ग में जी-8 की बैठक से पहले द्विपक्षीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय मसलों पर विचार-विमर्श किया.
रूस और अमरीकी अधिकारियों ने कहा है कि दोनों नेताओं की इस बैठक में भी ऐसी कोई द्विपक्षीय समझ नहीं बन सकी जिससे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की सदस्यता पाने के लिए रूस का रास्ता साफ़ हो सके.
राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि इस बारे में अभी और बातचीत किए जाने की ज़रूरत है क्योंकि वह सुनिश्चित हो जाना चाहते हैं कि इस तरह की कोई समझ अगर बनती है तो उसे अमरीकी कांग्रेस में मंज़ूरी मिल जाए.
दोनों देशों के वार्ताकारों ने इस मुद्दे पर कई दिन तक सघन बातचीत की और दोनों नेताओं की बातचीत से पहले भी देर रात तक बातचीत हुई जिसमें जी8 की बैठक से पहले किसी समझौते पर पहुँचने की काफ़ी कोशिश की गई.
बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता का कहना है कि इस बातचीत का नाकाम होना रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए एक बड़ा झटका है जिन्होंने जी8 बैठक से पहले किसी सकारात्मक नतीजे की उम्मीद की थी.
समीक्षकों के अनुसार इस बातचीत में रूस के विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ में शामिल होने के अलावा ऊर्जा सुरक्षा, मध्य पूर्व के मुद्दे भी उठे होंगे.
राष्ट्रपति बुश ने शुक्रवार को दोहराया था कि रूस में आंतरिक आज़ादी को लेकर जो चिंता वह जताते रहे हैं, उस पर क़ायम हैं.
ग़ौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन इस मुद्दे को बार-बार उछालने के लिए अमरीका की आलोचना कर चुके हैं.
ऊर्जा सुरक्षा
पुतिन ने पिछले दिनों पश्चिमी आलोचकों को क़रारा जवाब देते हुए उनसे 'उपनिवेशवादी' रवैया छोड़ने और रूस के आंतरिक मामलों में दख़ल देने से बाज आने की नसीहत दी थी.
धनी देशों के समूह जी-8 का मानना है कि उनके लिए ज़रूरी ऊर्जा स्रोतों की सुरक्षित आपूर्ति बनाए रखने में रूस अहम भूमिका निभा सकता है.
दूसरी ओर रूस अपने ग्राहकों की सुरक्षा की गारंटी चाहता है.