सोमवार, 10 जुलाई, 2006 को 13:54 GMT तक के समाचार
रूसी सुरक्षा सेवा के अधिकारियों ने चेचन विद्रोही शमील बसायेफ़ को मारने का दावा किया है. चालीस साल के इस खूंखार चरमपंथी की तलाश रूसी अधिकारियो को कई वर्षों से थी.
माना जाता है कि शमील बसायेफ़ कई हमलो में शामिल थे. दो साल पहले रूस में बेसलान स्कूल हादसे के पीछे भी उन्हीं का दिमाग़ था. जिसमें कई स्कूली बच्चो समेत 320 लोग मारे गए थे.
लेकिन शमील बसायेफ़ ने इसे सिरे से ख़ारिज किया था और कहा था कि ये काम रूसी ख़ुफ़िया सेवाओं का था. शमिल बसायेफ़ का जन्म 1965 के जनवरी महीने में हुआ था.
उनका नाम इमाम शमील के नाम पर रखा गया था जिन्होंने पिछली सदी में कई संघर्षो में हिस्सा लिया था. शमील बसायेफ़ शुरू से ही क्रांतिकारी विचारों वाले माने जाते थे.
पहली बार वो चर्चा में उस समय आए जब उन्होंने रूस के यात्री विमान का अपहरण कर लिया और उसे तुर्की में उतरने पर मजबूर किया.
इसके बाद एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर उन्होंने दुनिया के सामने अपना पक्ष रखा और चेचन समस्या के बारे में बताया.
विद्रोह
1994 में जब रूसी सेनाओं ने चेचन्या पर हमला किया तो विद्रोह के जो स्वर उठे उसमें शमील बसायेफ़ सबसे आगे थे और उन्होनें रूसी सेनाओ का मुक़ाबला किया.
1996 में चेचन्या में युद्ध ख़त्म होने पर जब रूस को अपनी सेनाएँ हटानी पड़ी तो राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में भी वो खड़े हुए.
हालाँकि इस पद के लिए वो चुने नहीं जा सके लेकिन स्वघोषित चेचन रिपब्लिक ऑफ़ इचकेरिया के प्रधानमंत्री शमील बसायेफ़ ज़रूर बने.
शमिल बसायेफ़ का मानना था कि रूसी नागरिकों को निशाना बना सही है और हर मौक़े पर उन पर हमला करना चाहिए.
चेचन्या में बड़ी संख्या में लोगों को बंधक बनाने की जो पहली घटना हुई थी उसकी ज़िम्मेदारी शमील बसायेफ़ ने ख़ुद ली थी और साथ ही दावा किया था कि चार साल पहले मॉस्को के थिएटर में लोगो को बंधक बनाने में भी उन्हीं का हाथ था. इस घटना में 129 लोग मारे गए थे.
माना जाता है कि चेचन्या की राजधानी ग्रोज़्नी में दो साल पहले बम हमले में चेचन्या के राष्ट्रपति अखमद कादियोरोफ़ के मारे जाने में भी बसायेफ़ का हाथ था.
राष्ट्रपति कादियोरोफ़ को रूस का समर्थन प्राप्त था. कई अन्य हमलो में भी शमील बसायेफ़ का हाथ रहा है जिसमें सरकारी संस्थानो पर और पुलिस थानों पर हुए हमलों की घटनाएँ शामिल हैं.
उन पर अल क़ायदा से भी संबंध होने का आरोप लगाया जाता रहा लेकिन शमील बसायेफ़ ने इससे इनकार किया था.