शुक्रवार, 07 जुलाई, 2006 को 06:12 GMT तक के समाचार
दक्षिण अफ्रीका की एक अदालत ने स्कूलों में लड़कियों के नथ पहनने पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है.
एक हिंदू लड़की ने प्रतिबंध का विरोध किया था.
मानवाधिकार संगठनों से जुड़े वकीलों ने अदालत के इस फ़ैसले का स्वागत किया है.
डरबन में स्थित गर्ल्स हाई स्कूल के प्रशासन ने लड़कियों के नथ पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था.
प्रशासन ने कानों में पहने जाने वाले जेवरात और घड़ी के अलावा कोई भी अन्य जेवर न पहनने का निर्देश दिया था.
स्कूल के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ 15 वर्षीय छात्रा सुनाली पिल्लै के परिवार ने अपीली अदालत का दरवाजा खटखटाया था.
उन्होंने तर्क दिया कि नथ पहनना हिंदू परंपरा का हिस्सा है और हिंदू लड़कियों को इसकी इजाज़त मिलनी चाहिए.
फ़ैसला
पीटरमैरिट्जबर्ग की अपीली अदालत के जज डुमिले कोंडिले ने अपने फ़ैसले में इस प्रतिबंध को भेदभावपूर्ण करार दिया है.
उन्होंने कहा कि इस प्रतिबंध को किसी भी तरीके से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता.
इससे पूर्व रंग या नस्ल के आधार पर भेदभाव के मामलों की सुनवाई करने के लिए गठित अदालत ने स्कूल प्रशासन के फ़ैसले को सही ठहराया था.
मानवाधिकार वकील फ्रिट्ज गेयर्ड्स ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "यह छात्र छात्राओं को कुछ भी करने की छूट देने का फ़ैसला नहीं है. लेकिन निश्चित तौर पर यह संदेश गया है कि अब धार्मिक और सांस्कृतिक असहिष्णुता के दिन लद चुके हैं."
सुनाली की माँ नवि पिल्लै ने फ़ैसले पर खुशी जताते हुए कहा, "मैंने आवाज़ उठाई और इसे सुना गया. अब यह साबित हो गया है कि प्रतिबंध ग़लत था."
स्कूल प्रशासन ने पिछले वर्ष सुनाली के परिवार का पत्र लिख कर यह बताया था कि उन्हें नथ पहनने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
पत्र में दस दिनों के भीतर नथ नहीं उतारने पर सुनाली को स्कूल से बाहर निकालने की बात कही गई थी.