उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण से उपजे हालात पर बातचीत के लिए अमरीकी प्रतिनिधि क्रिस्टोफर हिल चीन पहुंच गए हैं.
क्रिस्टोफर हिल की कोशिश उत्तर कोरिया पर अंतरराष्ट्रीय रुख में एकरुपता लाने की होगी. वह उत्तर कोरिया पर अमरीका के मुख्य वार्ताकार हैं.
उनके चीन आने से पहले उत्तर कोरिया ने धमकी दी है कि अगर उसके ख़िलाफ़ दबाव बनाने की कोशिश हुई तो वह और मिसाइलों का परीक्षण करेगा.
अमरीका ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाने के जापान के प्रस्ताव का समर्थन किया है लेकिन चीन इसके पक्ष में नहीं है.
चीन कूटनीतिक तरीके से समाधान चाहता है और इसके लिए वह अपने प्रतिनिधियों को अगले हफ़्ते उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग भेज रहा है.
मिसाइल परीक्षण पर कड़ा विरोध जताने के बावज़ूद दक्षिण कोरिया भी प्रतिबंध थोपने के पक्ष में नहीं है.
वार्ता से इंकार
इस बीच मिसाइल परीक्षण के बाद उपजे तनाव के मद्देनज़र दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया की बातचीत की पेशकश को ठुकरा दिया है.
उत्तर कोरिया ने मिसाइल परीक्षण से दो दिन पहले सैन्य स्तर पर बातचीत शुरु करने का प्रस्ताव दिया था.
बदले हालात में दक्षिण कोरिया की सेना ने कहा है कि बातचीत की तारीख़ अब बाद में तय की जाएगी.
दोनों देशों की सेनाओं के बीच पिछली दफ़ा मई में वार्ता हुई थी. इसमें उत्तर कोरिया ने समुद्री सीमा में बदलाव करने की माँग की और इस मसले पर बातचीत विफल हो गई.
उत्तर कोरिया ने बुधवार को सात मिसाइलों का परीक्षण किया था जिसमें लंबी दूरी की तेपोदोंग-2 मिसाइल का प्रक्षेपण विफल रहा.
हालाँकि उत्तर कोरिया ने सभी परीक्षण सफल होने का दावा किया है. तेपोदोंग-2 मिसाइल के रेंज में अमरीका का अलास्का भी आ सकता है.
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, "मिसाइल परीक्षण सामान्य सैनिक गतिविधियों का हिस्सा है. हमारी सेना आगे भी इस तरह का परीक्षण करती रहेगी."