गुरुवार, 06 जुलाई, 2006 को 09:12 GMT तक के समाचार
उत्तर कोरिया ने बुधवार को किए गए मिसाइलों के परीक्षण की पुष्टि की है और साथ ही कहा है कि वह आगे भी मिसाइलों का परीक्षण करता रहेगा.
कोरिया ने चेतावनी दी है कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उस पर दबाव डालने की कोशिश की तो इसके "गंभीर परिणाम" हो सकते हैं.
उत्तर कोरिया ने बुधवार को सात मिसाइलों का परीक्षण किया था जिसमें से एक ताइपोदोंग-2 मिसाइल भी थी जिसकी मारक क्षमता अमरीका तक है. हालाँकि यह मिसाइल 40 सेकंड बाद नाकाम हो गई थी.
दक्षिण कोरिया की मीडिया ने उत्तर कोरिया का एक बयान छापा है जिसमें बुधवार को किए गए मिसाइल परीक्षणों की पुष्टि की गई है.
उत्तर कोरिया की सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी ने विदेश मंत्रालय का एक बयान दिया है जिसमें कहा गया है कि मिसाइलों का परीक्षण अपनी रक्षा के लिए किए जाने वाले प्रयासों का हिस्सा है.
बयान में यह भी कहा गया है कि सेना आगे भी ऐसा करती रहेगी और मिसाइलों का परीक्षण करना उत्तर कोरिया का वैध अधिकार है.
दबाव की रणनीति
उधर अमरीका और जापान मिलकर उत्तर कोरिया के ख़िलाफ संयुक्त कार्रवाई के लिए समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं.
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने पूर्वी एशिया में अपने कई सहयोगियों से बातचीत की है ताकि उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ संयुक्त कार्रवाई के लिए समर्थन जुटाया जा सके.
बुश ने जापान के प्रधानमंत्री जुनीचिरो कोईजुमी और दक्षिण कोरिया के नेता रो मू ह्यून से भी बात की है.
ख़बरें हैं कि जापान उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाने की अमरीका की नीति से सहमत है. कहा जा रहा है कि इसके लिए जापान ने अमरीका को हर तरह का सहयोग करने का वादा किया है.
उधर दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह इस मसले पर अमरीका के साथ बातचीत कर रहा है.
अमरीकी अधिकारी क्रिस्टोफर हिल चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, जापान और रूस की यात्रा कर रहे हैं जहाँ वह मिसाइल परीक्षणों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर विचार विमर्श करने वाले हैं.
इतना ही नहीं जापान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण की आलोचना करने संबंधी एक प्रस्ताव पारित करवाने की कोशिश कर रहा है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में से जब जापान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत केंज़ो ओशिमा बाहर निकले तो उनके साथ अमरीका और ब्रिटेन के राजदूत भी थे.
जापानी राजदूत ने कहा कि उन्हें बिना किसी बाधा के मिसाइल परीक्षण की आलोचना संबंधी प्रस्ताव के पारित होने की उम्मीद है.
अमरीकी राजदूत जॉन बोल्टन ने कहा कि सुरक्षा परिषद में किसी भी देश ने उत्तर कोरिया का बचाव नहीं किया.