गुरुवार, 06 जुलाई, 2006 को 17:47 GMT तक के समाचार
विनीता द्विद्वेदी
बीबीसी संवाददाता, लंदन
सात जुलाई को जिस समय पहला धमाका हुआ मैं घटनास्थल से थोड़ी ही दूर बेकर स्ट्रीट अंडरग्राउंड स्टेशन पर थी.
यह स्टेशन एजवेयर रोड के बहुत क़रीब है जहाँ पहला बम धमाका हुआ था.
स्टेशन पर पहुँची ही थी कि उसे बंद कर दिया गया और सैंकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए थे.
ज़मीन के अंदर से चींटियों की तरह लंदन की सड़कों पर अंडरग्राउंड स्टेशनों से लोग निकल रहे थे.
कोई धक्कामुक्की, शोर शराबा नहीं चुपचाप लेकिन परेशान, हक्के बक्के. ख़बर थी कि कुछ हुआ है लेकिन क्या, यह पता नहीं.
अन्य लोगों की तरह मैं भी दफ़्तर पहुँचने के लिए बस में चढ़ गई जो धीमी रफ़्तार से चल रही थी.
यह बस, बुश हाउस के क़रीब, ठीक उस चौराहे से भी गुज़री जहाँ आखिरी बम धमाका हुआ था एक बस में.
यूँ कहिए, कि मेरी बस के पीछे आने वाली ही एक बस में वो धमाका हुआ टैविस्टोक स्केव्यर पर. मुझे पता तब चला जब दफ़्तर की इमारत बुश हाउस में दाख़िल होते हुए पीछे एक बदहवास सहयोगी से मुलाक़ात हुई.
उन्होंने कहा कि उनके ठीक पीछे वाली बस में धमाका हुआ है और उसकी छत उड़ गई.
अपने दफ़्तर वाले माले पर पहुँचने के कुछ देर बाद यह ख़बर पक्की हो गई कि ऐसे कुल चार घमाके हुए हैं.
लंदन के उस एक काले घंटे ने पूरी दुनिया को हिला दिया लेकिन धन्य हैं लंदनवासी कि उन्होंने हिम्मत और संयम का वो आदर्श क़ायम किया जो शायद ही कहीं देखने को मिले और मैं इस बात की गवाह हूँ.