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गुरुवार, 06 जुलाई, 2006 को 18:05 GMT तक के समाचार

राजेश प्रियदर्शी
बीबीसी संवाददाता, लंदन

कोई 'सीरियस इंसीडेंट' हुआ है...

सब कुछ आम दिनों की तरह था, अंडरग्राउंड स्टेशन पर पहुँचने पर पता चला कि किसी 'सीरियस इंसीडेंट' के कारण रेल सेवा बंद है.

मैंने बस पकड़ी जो आधे रास्ते जाकर रूक गई क्योंकि उसे सेंट्रल लंदन जाने की अनुमति नहीं थी.

लोगों के चेहरे पर गंभीरता थी लेकिन वह तो रोज़ होती है, लोग आम दिनों की तरह अख़बार पढ़ रहे थे, संगीत सुन रहे थे.

एक दोस्त ने फ़ोन करके बताया कि कई धमाके हुए हैं पर इस बात पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा था क्योंकि लोग रोज़ाना की तरह चुपचाप अपनी राह चल रहे थे.

मैंने एक घंटे का रास्ता पैदल तय करने का फ़ैसला किया. ख़बर पूरी दुनिया में जंगल की आग तरह फैल चुकी थी.

भारत से मेरे भाई ने बहुत घबराकर फ़ोन किया लेकिन घबराहट लंदनवासियों के व्यवहार में नहीं दिखाई दे रही थी.

लोग बहुत शांति से पैदल चल रहे थे.

मैं दफ़्तर से अपना रिकॉर्डर और कैमरा लेकर रसेल एस्क्वेयर गया जहाँ एक बस में धमाका हुआ था.

मैंने अपनी आँखों से उस बस को देखा जिसमें धमाका हुआ था और लंदन फ़ायर ब्रिगेड के कर्मचारी उसका मलबा हटाने में लगे थे.

ज़्यादातर लोगों की तरह सबसे पहला ख़याल मुझे यही आया कि इस बस में मैं भी हो सकता था.

शोर-शराबा, भगदड़, बेचैनी, घबराहट या अफ़रा-तफ़री मचाए बिना लोगों ने पुलिस-प्रशासन के निर्देशों का जिस तरह पालन किया उससे लंदन शहर के प्रति मेरे मन में सम्मान काफ़ी बढ़ गया.