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गुरुवार, 06 जुलाई, 2006 को 13:50 GMT तक के समाचार

हुसैन परिवार अब भी सकते में है

लंदन धमाकों के लिए ज़िम्मेदार एक हमलावर हसीब हुसैन के पिता महमूद हुसैन का कहना है कि उन्हें अब भी भरोसा नहीं हो रहा है कि उनका बेटा इस तरह के हमले करने में सक्षम था.

पुलिस का कहना है कि हसीब हुसैन ने लंदन में बस नंबर 30 को बम से उड़ाया था. बीबीसी ने उस पर हमले पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है जिसमें सत्य घटनाओं को शामिल किया गया है.

उस बस हमले में मौत का शिकार हुई एक लड़की नीतू जैन के प्रेमी गौस अली ने महमूद हुसैन का सामना किया है. महमूद हुसैन लीड्स में अपने घर के बाहर खड़े होकर गौस अली से कहते हैं, "अभी तक किसी ने मुझे ऐसा कोई सबूत नहीं दिखाया या बताया है जिससे यह साबित हो कि वो हमला हसीब हुसैन ने किया था."

महमूद हुसैन का कहना है कि उनके परिवार को ऐसी किसी साज़िश की जानकारी नहीं थी, "अगर मुझे यह पता होता कि मेरा बेटा ऐसा काम करने वाला है तो मैं उसकी टांगें तोड़ देता."

ग़ौरतलब है कि सात जुलाई 2005 को लंदन में हुए चार धमाकों में 52 लोगों की मौत हुई थी और अनेक घायल हुए थे. उन हमलों में तीन भूमिगत रेलगाड़ियों और एक बस को निशाना बनाया गया था.

19 वर्षीय हसीब हुसैन को बस में हुए हमले के लिए ज़िम्मेदार बताया गया था. उस हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी.

'अंधेरे में'

गौस अली ने महमूद हूसैन से मुलाक़ात की गुज़ारिश की थी लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला. इसलिए उन्होंने हुसैन परिवार के घर जाने का फ़ैसला किया और उनके साथ बीबीसी के एक शोधकर्ता थे.

महमूद हुसैन शुरू में तो कुछ बात करने के लिए तैयार नहीं थे लेकिन फिर बताया कि उन्हें जानकारी थी कि उनका बेटा हसीब हुसैन पिछले साल छह जुलाई को लंदन में अपने कुछ दोस्तों से मिलने गया था.

महमूद हुसैन ने फिर दोहराते हुए कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि उनका बेटा इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार था और परिवार में किसी को भी ऐसे किसी बम हमले की साज़िश के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

उनका कहना है कि परिवार अभी नहीं समझ पाया है कि असल में क्या हुआ, "हम अब भी अंधेरे में हैं और बहुत से सवालों के जवाब की तलाश में हैं."

सार्वजनिक जाँच की माँग

महमूद हुसैन ने बताया कि बाक़ी तीन आत्मघाती हमलावर भी उनके घर आए थे और उन्हें उन्होंने अच्छे व्यवहार वाले व्यक्ति बताया.

महमूद हुसैन ने कहा कि मीडिया ने दावा किया है कि उनके बेटे के दोस्त कट्टर थे लेकिन उनके लिए वे सामान्य व्यक्ति थे.

हुसैन ने कहा कि सात जुलाई 2005 को हुए हमलों की सार्वजनिक जाँच होनी चाहिए ताकि लोगों को असलियत का पता चल सके.

गौस अली का कहना है कि उनका विश्वास है कि हसीब हुसैन के परिवार को हमलों की साज़िश के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि महमूद हुसैन ने आरोपों का गंभीर रूप से खंडन किया लेकिन दोनों ने जो कुछ खोया उस पर दोनों ही भारी तकलीफ़, दर्द, चिंता, डर और सदमे में हैं.

गौस अली का कहना है कि महमूद हुसैन के परिवार पर भरोसा नहीं करने की कोई वजह नज़र नहीं आती क्योंकि वो लोग भी उसी नुक़सान और तकलीफ़ के शिकार हुए हैं जिस तरह से वो (गौस अली) ख़ुद और अन्य लोग.

लेकिन गौस अली ने यह भी कहा, "महमूद हुसैन के बेटे हसीब हुसैन से मुझे कोई हमदर्दी नहीं है क्योंकि वह एक हत्यारा था और यह सच हमेशा रहेगा."