बुधवार, 28 जून, 2006 को 15:04 GMT तक के समाचार
अरब मामलों के जानकार मगदी अब्दुल हादी का मानना है कि इसराइलियों और अमरीकियों के लिए ख़ालिद मशाल शांति और इसराइल दोनों ही के कट्टर दुश्मन हैं.
वहीं कई फ़लस्तीनियों के लिए वो महानायक समान है, उनके हीरो हैं. ठीक उसी छापामार की तरह जिसने इसराइली सैनिक का अपहरण किया.
ये कहना मुश्किल है कि क्या इसके आदेश दमिश्क से खालिद मशाल ने दिए.
इसराइलियों ने तो इस बारे में सार्वजनिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा है.
लेकिन ख़ालिद मशाल के विचारों से सभी अवगत है. उन्होंने हमेशा ही इसराइल पर किसी भी फ़लस्तीनी हमले का स्वागत किया है.
कई फलिस्तीनियों की तरह वो ये मानते हैं कि इसराइली क़ब्ज़े के विरोध का ये सही त़रीक़ा है.
ख़ालिद मिशाल को 1997 में जार्डन में इसराइली खुफिया एजेंटों ने ज़हर दे कर मारने का कोशिश की थी और तभी उनकी अंतरराष्टीय स्तर पर पहचान बनी.
इसराइल ने तब उन पर ये आरोप लगाया था कि वो ही इसराइली नागरिकों पर आत्मघाती हमलों की योजनाओं के लिए ज़िम्मेदार हैं.
दो साल बाद अमरीकी दबाव में आकर जॉर्डन ने उन्हें देश छोड़ने को कहा और फिर खाड़ी देशों में रहने के बाद वो दमिश्क जा पहुँचे.
इसराइल के क़ानून मंत्री हैम रामोन ने कहा कि ख़ालिद मशाल उनके निशाने पर है.
इसराइली सरकार के प्रवक्ता गिडियोन मियर ने कहा कि इसराइली सरकार अपने लोगों की रक्षा के लिए कुछ भी कर सकती है, "मैं कहता हूँ कि आतंकवादी जो निर्दोष इसराइलियों की हत्या करता है, वो इसराइली सुरक्षा सेना के निशाने पर है. हम आतंक को समाप्त करना चाहते हैं और ये अंतरराष्टीय समुदाय नहीं कर सकता, इन्हें रोकने का एक ही त़रीक़ा है - उन्हें निशाना बनाया जाए."
हमास के धार्मिक नेता शेख अहमद यासीन कि 2004 में इसराइल द्वारा की गई हत्या के बाद ख़ालिद मशाल को हमास के राजनितिक ब्यूरो का प्रमुख बनाया गया.
अरब मामलों के विश्लेषक मगदी अब्दुल हादी के अनुसार ग़ज़ा की गुप्त व्यवस्था को देखते हुए उनके प्रभाव के बारे में सभी कुछ स्पष्ट नहीं. ये भी स्पष्ट नहीं कि संगठन के लड़ाकू दस्तों पर उनका क्या और कितना प्रभाव है.