मध्य पूर्व की वर्ष 2005 की संभवत सबसे महत्वपूर्ण घटना थी चार दशक के क़ब्ज़े के बाद ग़ज़ा से इसराइल की वापसी.
इसके बाद कुछ-कुछ उम्मीद बँधने लगी थी कि मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.
अब एक बार फिर इसराइलियों में यह धारणा घर करने लगी है कि शांति और सुरक्षा के बदले ज़मीन के समझौते की बात करना बेकार है.
इसी तरह फ़लस्तीनियों ने एक ऐसी पार्टी को सरकार बनाने के लिए चुना जो इसराइल के विनाश की क़सम खाकर हथियारबंद अभियान चला रही हो.
हमास के सत्ता में आने के बाद से स्थिति गड़बड़ाती दिख रही है.
ग़ज़ा में हिंसा और अव्यवस्था का बोलबाला रहा है और फ़लस्तीनी गुटों के बीच सत्ता का संघर्ष जारी है.
इसराइल ने कई बार फ़लस्तीनी इलाक़ों पर हमले किए हैं जिनमें कम से कम 12 फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं.
हमास के सत्ता में आने के बाद से लगी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक पाबंदियों की वजह से आम लोगों का जीवन वैसे ही और कठिन हो गया है.
गज़ा और पश्चिमी तट में कड़वाहट एक बार फिर बढ़ रही है, रविवार को जब फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने इसराइली सैनिक चौकी पर हमला किया और एक सैनिक को बंधक बना लिया तो फ़लस्तीनियों ने इस पर अपनी ख़ुशी प्रकट की.
और अब जिस तरह से इसराइली सेना ग़ज़ा में घुसी है उसका कम से एक परिणाम तो तय है, इससे ग़ज़ा में माहौल और विषाक्त ही होगा.