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सैनिक की रिहाई है प्राथमिकता: इसराइल

फ़लस्तीनी चरमपंथियों के एक सैनिक चौकी पर हमले के बाद इसाइली प्रतिक्रिया तय करने के लिए इसराइल के मंत्रिमंडल की बैठक हुई है.

इसराइल के रक्षा मंत्री अमीर पेरेट्ज़ ने फ़लस्तीनी चरमपंथियों को चेतावनी दी है कि ग़ज़ा पट्टी के पास सीमा पर स्थित इसराइली सैनिक चौकी पर हमले के लिए उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने सैनिक चौकी पर हमला किया जिसमें दो इसराइली और दो फ़लस्तीनी मारे गए और चरमपंथी एक सैनिक को जबरन पकड़ कर अपने साथ ले गए.

संयुक्त राष्ट्र में इसराइलस के राजदूत ने बीबीसी को बैठक के बाद बताया है कि उनकी पहली प्राथमिकता उस सैनिक को रिहा करवाना है जिसका अपहरण किया गया है.

रिपोर्टों में कहा गया है कि इसराइल ने दो दिन तक किसी भी बड़ी सैनिक कार्रवाई पर रोक लगा दी है.

'बदला लिया जाएगा'

इसराइल कह चुका है कि जिस इसराइली सैनिक को जबरन पकड़ लिया गया है, इसराइल उसे छुड़ाने की पूरी कोशिश करेगा.

हमास की संघर्षविराम की ताज़ा पेशकश

उधर इसराइली मंत्रियों ने इसराइली सैनिक को घायल करने की सूरत में गंभीर परिणाम होने की चेतावनी दी है.

रक्षा मंत्री अमीर पेरेट्ज़ का कहना था कि यदि सैनिक को घायल किया जाता है तो इसराइल उसका बदला लेगा.

उधर फ़लस्तीनी चरमपंथी गुट पॉपुलर रेज़िज़टेंस कमेटीज़ का कहना है कि उसने चरमपंथी संगठन हमास के सैन्य विभाग की मदद के साथ ये हमला किया.

हमास का कहना है कि उसे उस सैनिक के बारे में कुछ नहीं पता लेकिन उसने अपहरण करने वालों से अनुरोध किया कि वे सैनिक से अच्छी तरह पेश आएँ और उसे जिंदा रखे.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार जिस सैनिक को चरमपंथी पकड़ कर ले गए वह 19 वर्षीय गिलाद शालित है और वह एक टैंक का गन्नर था और चरमपंथियों के हमले के दौरान पकड़ा गया.