रविवार, 25 जून, 2006 को 03:40 GMT तक के समाचार
इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी देश में जारी हिंसक गतिविधियों को समाप्त करने के उद्देश्य से संसद में रविवार को एक राष्ट्रीय स्तर की मेल मिलाप संबंधी योजना का प्रस्ताव रखा है.
इराक़ में सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही हिंसक गतिविधियां जारी हैं और धीरे धीरे शिया सुन्नी गुटों के बीच संघर्ष भी बढ़ गया है.
इराक़ी अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय मेल मिलाप योजना में 28 बिंदु हैं जिसमें कई चरमपंथी गुटों को क्षमादान देने का प्रस्ताव भी है जिससे वो राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हो सकें.
हालांकि अल क़ायदा और उससे जुड़े उन संगठनों को क्षमादान नहीं दिया जाएगा जिन्होंने इराक़ की आम जनता को निशाना बनाया है.
इस प्रस्ताव के बीच चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं कि कुछ चरमपंथी गुट इन प्रस्तावों को खारिज कर सकते हैं.
इस योजना का मुख्य प्रस्ताव है सुन्नी अरब चरमपंथी गुटों के साथ एक संवाद कायम करना और इसी के तहत क्षमादान की पेशकश की गई है.
इस योजना में समुदाय के आधार पर ( शिया सुन्नी ) हिंसा रोकने की कोशिश भी शामिल है और एक बेहतरीन इराक़ी सेना के निर्माण की भी ताकि वो इराक़ की सुरक्षा का पूरा भार अमरीकी सेनाओं से अपने हाथ में ले सकें.
रिपोर्टों के अनुसार इस योजना के ज़रिए मलिकी इराक़ की सुरक्षा पूर्ण रुप से इराक़ी सेना के हाथों में लाने के अपने वादे को पूरा करने की भी कोशिश करेंगे.
उधर अमरीका से मिली ख़बरों के अनुसार अमरीकी सेना अगले 12 महीनों में अपने सैनिकों की संख्या में कमी लाना चाहती है.
राष्ट्रीय मेल मिलाप योजना में सद्दाम हुसैन की बाथ पार्टी के पूर्व सदस्यों की स्थिति की समीक्षा का भी प्रस्ताव है. अमरीकी हमले के बाद बाथ पार्टी के कार्यकर्ताओं के पास कोई काम नहीं है.
सुन्नी अरब राजनीतिज्ञों ने राष्ट्रीय योजना का सावधानीपूर्वक स्वागत किया है. संसद के एक सदस्य सलीम अब्दुल्ला का कहना था कि यह योजना तभी कारगर सिद्ध होगी जब अधिक से अधिक हथियारबंद गुटों को क्षमादान दिया जाएगा.
इराक़ी संसद के स्पीकर महमूद अल मशदानी का कहना है कि इन प्रस्तावों के ज़रिए सुरक्षा और शांति का वातावरण तैयार करने की कोशिश की जाए रही है.