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गुरुवार, 22 जून, 2006 को 07:58 GMT तक के समाचार

इराक़ से सेना की वापसी के प्रस्ताव गिरे

इराक़ से अमरीकी सैनिकों की वापसी के दो प्रस्ताव अमरीकी सीनेट में नामंज़ूर कर दिए गए हैं.

दोनों प्रस्ताव डेमोक्रेट सांसदों की ओर से रखे गए थे और राष्ट्रपति बुश की रिपब्लिकन पार्टी ने इनका विरोध किया.

इन दो प्रस्तावों में से एक में अगले साल के मध्यतक इराक़ से अमरीकी सेना को हटा लेने का प्रस्ताव था जबकि दूसरे में सेना को चरणबद्ध ढंग से हटाने की बात कही गई थी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि डेमोक्रेट को उम्मीद थी कि इन प्रस्तावों से वे इराक़ के प्रति बुश प्रशासन में बढ़ती चिंता का लाभ उठा पाएँगे.

डेमोक्रेट मान रहे थे कि इसका फ़ायदा नवंबर में होने वाले चुनावों में भी हो सकेगा लेकिन एक बार फिर पार्टी में दरार ही सतह पर दिखाई दी है.

'डेमोक्रेटिक पार्टी में मतभेद'

अमरीकी सैनिकों की वापसी की संभावित समयसूची तय करने के प्रस्तावों पर ज़ोरदार बहस ज़रुर हुई.

इस समय इराक़ में एक लाख 27 हज़ार अमरीकी सैनिक तैनात हैं.

उधर रिपब्लिकन पार्टी ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर आरोप लगाया है कि वह 'आतंकवाद' के मुद्दे पर कमज़ोर नीति अपना रही है.

रिपब्लिकन पार्टी ने डेमोक्रेटिक पार्टी के दो सुझावों की ख़िल्ली उड़ाते हुए कहा है कि ये सुझाव डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर मतभेदों को दर्शाते हैं.

अमरीकियों की नाराज़गी

उनके अनुसार सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी की इस मुद्दे पर सीनेट में जीत की संभावना कम है लेकिन उसका मानना है कि वह देश में अनेक जगह लोकप्रियता हासिल कर सकती है क्योंकि अमरीकियों में इराक़ के मुद्दे पर काफ़ी नाराज़गी है.

न्यूयॉर्क से डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेटर हिलेरी क्लिंटन का कहना था, "समय आ गया है कि चयन किया जाए कि क्या ज़्यादा महत्वपूर्ण है -इराक़ में जीतने की रणनीति या फिर रिपब्लिकन पार्टी की अमरीका में चुनाव जीतने की रणनीति."

लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के सुझावों को ख़ारिज करते हुए रिपब्लिकन पार्टी सीनेटर जॉन मक्कीन का कहना था, "फ़ैसला उस देश में परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए, न कि अमरीकी राजनीतिक के मुताबिक तय की गई किसी समयसूची के कारण."