सोमवार, 19 जून, 2006 को 11:13 GMT तक के समाचार
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ चल रहे मुक़दमे में अभियोग पक्ष के वकील ने सद्दाम हुसैन और दो अन्य अभियुक्तों को मौत की सज़ा दिए जाने की मांग की है.
सद्दाम हुसैन और सात अन्य लोगों के ख़िलाफ़ दुजैल नरसंहार के मामले में मुक़दमा चल रहा है. इन लोगों पर 1980 के दशक में 148 शिया मुसलमानों की हत्या का आरोप है.
सभी अभियुक्त अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हैं. इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से आख़िरी दलील 10 जुलाई को दी जाएगी. जिसके बाद पाँच सदस्यीय जजों का पैनल इस पर फ़ैसला सुनाएगा.
सोमवार को अभियोग पक्ष के एक वकील ने अपनी आख़िरी दलील के दौरान कहा कि अभियुक्तों ने दुजैल में सोची-समझी रणनीति के तहत व्यापक हमला किया. इस वकील का नाम सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं किया गया है.
उन्होंने कहा, "इन लोगों ने बड़ी संख्या में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को क़ैद करके शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी. क़ैद लोगों को बिजली के झटके तक दिए गए."
तर्क
वकील ने तर्क दिया कि सद्दाम हुसैन को मारने की कोशिश वाली बात राजनीतिक लाभ के लिए गढ़ी गई थी. लेकिन बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि सद्दाम हुसैन को जान से मारने की कोशिश के बाद कार्रवाई ज़रूरी थी.
बचाव पक्ष के वकील ने यह भी दावा किया कि जिन 148 लोगों के मारे जाने की बात कही जा रही है, वे अभी ज़िंदा हैं.
अदालत की कार्यवाही के दौरान सद्दाम हुसैन के सौतेले भाई बरज़ान अल तिकरिती ने कई बार मुख्य जज रऊफ़ अब्दुल रहमान को रोकने की कोशिश की.
जज ने उनसे कहा कि अभियोग पक्ष की दलील सुनने के बाद वे उनकी बात भी सुनेंगे. दुजैल नरसंहार के मामले में सद्दाम हुसैन और सात अन्य लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा आठ महीने से चल रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क़ानून के जानकारों ने इसकी आलोचना भी की है.
कुछ जानकारों का कहना है कि मुक़दमे के दौरान बचाव पक्ष को अपेक्षाकृत कम समय दिया गया. मुक़दमे के दौरान बचाव पक्ष के दो वकीलों के मारे जाने और पहले मुख्य जज के त्यागपत्र के कारण थोड़ी रुकावट भी आई.