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बुधवार, 14 जून, 2006 को 11:11 GMT तक के समाचार

अमरीका 'शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा'

यूरोपीय और बहुत से मुस्लिम देशों के लोगों का मानना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की तुलना में अमरीका से विश्व शांति को ज़्यादा बड़ा ख़तरा है.

पीयू शोध समूह के सर्वेक्षण से यह निष्कर्ष निकला है.

इसके मुताबिक़ अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और उनकी 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' की नीति को समर्थन देने वाले लोगों की संख्या में भारी कमी आई है.

सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2004 में आए विनाशकारी सूनामी से प्रभावित देशों को अमरीकी सहायता से उसके प्रति जो सहानुभूति पैदा हुई थी, उसमें भी गिरावट आई है.

31 मार्च से 14 मई 2006 के बीच किए गए इस सर्वेक्षण में अमरीका समेत 15 देशों के 17 हज़ार लोगों की राय पूछी गई.

पीयू की यह सलाना सर्वेक्षण रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने मंगलवार को इराक़ का दौरा कर अपने देश के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की है.

भारत-पाकिस्तान

ताज़ा सर्वेक्षण के मुताबिक 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' की अमरीकी नीति को ख़ासकर भारत, स्पेन और तुर्की के लोग अब पहले जैसा समर्थन नहीं दे रहे हैं.

दूसरी ओर भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान के लोगों में पिछले एक वर्ष के दौरान अमरीका की तरफ़दारी बढ़ी है.

अमरीकी नीतियों को मिल रहा समर्थन भारत में 71 प्रतिशत से घटकर 56 प्रतिशत रह गया है.

सामरिक मामलों के विश्लेषक सी उदयभास्कर ने सर्वेक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अमरीका के तरफ़दारों में भारी कमी आने का एक कारण है इराक़ युद्ध समाप्त करने में उसका विफल रहना."

हालाँकि बुश के नेतृत्व में भारतीयों का विश्वास बढ़ा है. पिछले वर्ष सर्वेक्षण में शामिल 54 प्रतिशत लोगों की तुलना में इस बार 56 प्रतिशत भारतीयों ने बुश की नेतृत्व क्षमता को सराहा.

अन्य देश

स्पेन में अमरीकी नीतियों की तरफ़दारी करने वालों की संख्या 41 प्रतिशत से गिरकर 23 प्रतिशत और तुर्की में 23 प्रतिशत से घटकर 12 प्रतिशत रह गई है.

अमरीका को छोड़कर सर्वेक्षण में शामिल 14 अन्य देशों में बहुमत की राय थी कि इराक़ पर हमले ने दुनिया को अधिक ख़तरनाक बना दिया है.

अमरीका के सबसे बड़े सहयोगी ब्रिटेन में 60 फ़ीसदी लोगों का कहना था कि इराक़ युद्ध से दुनिया कम सुरक्षित रह गई है जबकि 30 फ़ीसदी ने कहा कि इससे सुरक्षा की भावना मज़बूत हुई है.

अमरीका से सर्वाधिक सुनामी सहायता पाने वाले इंडोनेशिया में वर्ष 2005 में 38 प्रतिशत लोगों ने अमरीका के पक्ष में राय दी थी लेकिन वर्ष 2006 में यह आँकड़ा घटकर 30 प्रतिशत रह गया है.

ईरान की चिंता

सर्वेक्षण के अनुसार अमरीका और यूरोप में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लोगों की चिंताएँ पिछले एक वर्ष में बढ़ी है.

अमरीका का आरोप है कि ईरान परमाणु बम बनाने के लिए यूरोनिएम संवर्द्धन कर रहा है जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

अमरीका में जितने लोगों से प्रतिक्रिया ली गई उनमें से 46 प्रतिशत का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार मध्य पूर्व और विश्व शांति के लिए 'बड़ा ख़तरा' है.

दूसरी ओर मुस्लिम बहुल आबादी वाले देशों के लोग ईरान को लेकर कम सशंकित हैं.