अबू बकर बशीर को देखकर ऐसा नहीं लगता कि उनकी छवि किसी ऐसे व्यक्ति से मिलती-जुलती हो जो अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की गतिविधियों का अभियुक्त हो सकता है.
बकर 68 वर्ष के बुज़ुर्ग हैं जिनकी छितरी हुई और सफ़ेद दाढ़ी है. सिर पर एक टोपी पहनते हैं और उनकी आँखों पर भारी चश्मी लगा रहता है.
बाली में 2002 में बम हमले के सिलसिले में उन्हें गिरफ़्तार किए जाने से पहले तक बकर मध्य जावा के सोलो शहर में इस्लामी शिक्षा के एक अध्यापक थे. बकर अब भी ज़ोर देकर कहते हैं कि वह साधारण अध्यापक हैं.
लेकिन इंडोनेशिया और विदेशों में बहुत से लोगों का कहना है कि अबू बकर बशीर जमा इस्लामिया संगठन के आध्यात्मिक नेता थे या हैं.
जमा इस्लामिया के बारे में कहा जाता है कि उसका संबंध अल क़ायदा से है.
बाली बम हमलों के बाद अबू बकर बशीर को गिरफ्तार किया गया था और जमा इस्लामिया के साथ-साथ उन पर बाली बम हमलों सहित कई अन्य हमलों में हाथ होने का आरोप लगाया गया था.
अबू बकर पर इंडोनेशिया की पूर्व राष्ट्रपति मेगावती सुकार्णोपुत्री की हत्या की साज़िश में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया था.
लेकिन अभियोजन पक्ष को ये आरोप साबित करने के लिए ख़ासी मशक्कत करनी पड़ी. पहले तो अदालत ने अबू बकर की जमा इस्लामिया का आध्यात्मिक नेता होने का आरोप यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं.
इसके बाद अबू बकर को बाली बम धमाकों, मैरियट होटल में हुए बम धमाकों और कुछ अन्य मामलों में शामिल होने का आरोप लगाया गया.
दूसरे मुक़दमे में जजों ने कहा कि अबू बकर बाली बम धमाकों में शामिल नहीं रहे हैं लेकिन उन्होंने इसे मंज़ूरी अवश्य दी.
अबू बकर को "शैतानी साज़िश" में शामिल होने के लिए 30 महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई थी. मैरियट होटल पर हुए बम धमाकों में शामिल होने के आरोप से अबू बकर को बरी कर दिया गया था.
इस तरह 14 जून 2006 को अबू बकर 26 महीने की जेल की सज़ा काटकर रिहा हुए. उन्हें जकार्ता की एक जेल में रखा गया था.
प्रभावशाली मौलवी
अबू बकर का जन्म 1938 में पूर्वी जावा में हुआ था और वे दशकों से इस्लामी शिक्षा देते रहे हैं. इस तरह ख़ासतौर से वह दक्षिणी पूर्वी एशिया में एक प्रभावशाली मुस्लिम शिक्षक बन गए हैं. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि इस क्षेत्र में मुसलमानों के कट्टर धड़े पर अबू बकर का ख़ासा प्रभाव है.
अबू बकर का विचार रहा है कि कहीं भी एक इस्लामी राष्ट्र की स्थापना के लिए ज़रूरी है कि वहाँ पहले इस्लामी समाज की स्थापना की जाए.
जावा में सोलो मुस्लिम स्कूल चलाने के अलावा अबू बकर ने उस मुजाहिदीन काउंसिल काउंसिल में भी हिस्सा लिया था जो जोग्यजकार्ता में 2000 में हुई थी. इस काउंसिल के बारे में कहा जाता है कि वह इंडोनेशिया को एक इस्लामी देश बनाना चाहती है.
अबू बकर ने इंडोनेशिया में शरिया को सख़्ती से लागू करने की भी हिमायत की है.
सुहार्तो सरकार ने 1970 के दशक में अबू बकर को जेल भेजा था और आरोप लगाया था कि वे एक इस्लामी देश की स्थापना की भावनाओं को भड़का रहे थे.
अबू बकर बाद में और जेल से बचने के लिए मलेशिया चले गए थे और वहाँ लगभग 13 साल तक रहे. 1998 में जब सुहार्तो सरकार का पतन हो गया तो वे इंडोनेशिया वापस लौट आए.
अबू बकर बशीर ने अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन के समर्थन में भी आवाज़ उठाई थी लेकिन लादेन या आतंकवादी गतिविधियों के साथ कोई निजी नाता होने से हमेशा इनकार किया है.
अबू बकर बशीर ख़ुद पर लगे सभी आरोपों से हमेशा इनकार करते रहे हैं और वे जमा इस्लामिया से भी कोई नाता नहीं होने की बात करते हैं.
अबू बकर बशीर ने बाली बम धमाकों की भी निंदा की थी.