सोमवार, 12 जून, 2006 को 06:42 GMT तक के समाचार
एक अमरीकी वकील ने कहा है कि ग्वांतानामो बे में आत्महत्या करनेवाले तीन क़ैदियों में से एक को जल्द रिहा किया जाना था. लेकिन उसको इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी.
विदेशी क़ैदियों का प्रतिनिधित्व करनेवाले मार्क डेनबोज़ार ने बीबीसी को बताया कि रिहा किए जानेवाले 141 क़ैदियों में यह शख्स भी शामिल था. लेकिन अमरीकी अधिकारी यह तय नहीं कर पाए थे कि उसे कहाँ भेजा जाए.
अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि आत्महत्या करनेवाला यह क़ैदी मनी शमन तुर्की अल हबार्दी अल उतायबी था और उन्हें स्थानांतरित किए जाने की सिफ़ारिश की गई थी.
उन्होंने बताया कि शनिवार को आत्महत्या करनेवाले दो अन्य क़ैदी थे- अली अब्दुल अहमद और यासर तलत अल ज़ाहरानी.
प्रोफ़ेसर डेनबोज़ार ने बताया कि ग्वांतनामो बे में रखे क़ैदी असहाय नज़र आते हैं.
उनका कहना था,'' इन लोगों को बताया गया है कि जब वे 50 साल के होंगे तब बाहर आएंगे. उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है और उन्हें छूटने की कोई उम्मीद नहीं है.''
उनका कहना था कि अमरीकी नीति रही है कि लोगों को तब तक रिहाई के बारे में नहीं बताया जाता जब तक कि उन्हें रिहा किए जाने के स्थान के बारे में पता नहीं चल जाता.
'ध्यान खींचने का तरीका'
ग़ौरतलब है कि क्यूबा के ग्वांतानामो बे स्थित अमरीकी बंदीगृह में शनिवार को तीन क़ैदियों ने कपड़ों और चादरों से खुद को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी.
दूसरी ओर एक अमरीकी अधिकारी कॉलीन ग्रेफ़ी ने कहा कि ग्वांतानामो बे बंदीगृह में तीन क़ैदियों का 'आत्महत्या करना ध्यान खींचने का एक तरीका है.'
कॉलीन ग्रेफ़ी अमरीका में सार्वजनिक कूटनीति विभाग की उप सहायक सचिव हैं. कॉलीन ग्रेफ़ी ने बीबीसी से कहा कि ये आत्महत्याएँ 'जिहाद के मकसद को आगे बढ़ाने की एक योजना' का हिस्सा हैं.
आत्महत्याओं की इस घटना की सैन्य जाँच चल रही है. दोनों क़ैदी कैंप नंबर एक के अलग अलग जेलों में थे.
इसके पहले भी ग्वांतानामो बे के क़ैदी लगातार आत्महत्या करने की कोशिश करते रहे हैं लेकिन ऐसा पहली बार है जब आत्महत्या की कोशिश सफल हुई हैं.