सोमवार, 12 जून, 2006 को 08:16 GMT तक के समाचार
ईरान ने आईएईए यानि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को आगाह किया है कि वो ऐसा कुछ न करे जिससे परमाणु कार्यक्रम विवाद को सुलझाने के लिए हो रही कूटनीतिक कोशिशों को नुकसान पहुँचे.
आईएईए में ईरान के विशेष दूत अली असग़र ने 'सकारात्मक बहस' का आह्ववान किया है. आईएईए की वियना में आज से बैठक शुरू हो रही है.
पिछले हफ़्ते दुनिया के छह देशों- ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, अमरीका, रूस और चीन ने परमाणु विवाद सुलझाने के लिए ईरान के सामने कुछ प्रस्ताव रखे थे.
ईरान फ़िलहाल इन प्रस्तावों पर विचार कर रहा है.
कई देश ईरान को अपना यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम बंद करने पर राज़ी करवाने की कोशिश कर रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में आईएईए के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर ईरान के मुद्दे पर गहन विचार विमर्श करेंगे.
प्रस्ताव
ईरान पर आईएईए के अध्यक्ष मोहम्मद अल बारादेई की ताज़ा रिपोर्ट की भी बोर्ड समीक्षा करेगा.
इस बैठक से पहले, आईएईए में ईरान के राजदूत ने एजेंसी से संयम बरतने को कहा है.
उन्होंने रॉयटर्स को बताया, "हमें बार-बार आरोप नहीं दोहराने चाहिए, दूसरे पक्ष को ध्यान रखना होगा कि वो कुछ ऐसा न करे जिससे हालात बिगड़ जाएँ. हमें संयमित और सकारात्मक बहस करनी होगी."
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पश्चिमी देशों के कूटनयिक कोशिश करेंगे कि ज़्यादा से ज़्यादा सदस्य ईरान को दिए गए प्रस्तावों का समर्थन करे.
इन प्रस्तावों को सार्वजनिक नहीं किया गया है. लेकिन माना जा रहा है कि इनमें अमरीकी तकनीक के इस्तेमाल पर लगी रोक हटाना और विश्व व्यापार संगठन में ईरान की सदस्यता को समर्थन देना शामिल है.
प्रस्तावों का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चल रहे विवाद को सुलझाना है जिसमें यूरेनियम संवर्द्धन मुख्य मुद्दा है.
ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण मकसद के लिए है.
प्रस्तावों पर ईरान की ओर से आई प्रारंभिक प्रतिक्रिया पर पश्चिमी कूटनयिकों ने संतोष जताया है.
प्रस्तावों के मुताबिक शायद भविष्य में ईरान को यूरेनियम संवर्द्धन की अनुमति मिल सकती है.