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सोमवार, 12 जून, 2006 को 12:48 GMT तक के समाचार

तुर्की पर वार्ता के लिए यूरोपीय संघ राज़ी

यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री तुर्की को संघ की सदस्यता देने के मुद्दे पर बातचीत के लिए राज़ी हो गए हैं. साइप्रस की आपत्ति के कारण इस पर बातचीत नहीं हो पा रही थी.

रविवार रात और सोमवार की सुबह बातचीत के बाद इस पर सहमति हो पाई. साइप्रस चाहता था कि यूरोपीय संघ तुर्की पर इस बात के लिए दबाव डाले कि वह उसकी सरकार को मान्यता दे और साइप्रस के जहाज़ों के लिए अपने बंदरगाह खोले.

तुर्की ने लक्ज़ेमबर्ग में हो रही यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक का बहिष्कार करने की धमकी दी थी. यूरोपीय संघ ने इस समझौते के बारे में तुर्की को सूचित कर दिया है.

उम्मीद है कि इस ख़बर के बाद तुर्की के विदेश मंत्री अब्दुल्ला ग़ुल लक्ज़ेमबर्ग की बैठक में शामिल होने के लिए रवाना हो जाएँगे. पहले उन्होंने अपना दौरा टाल दिया था.

क़दम

यूरोपीय संघ ने साइप्रस की मांगों को स्वीकार के लिए कुछ क़दम उठाए हैं. यूरोपीय संघ ने लिखित में तुर्की को ये याद दिलाया है कि अगर उसने अपने वादे को पूरा नहीं किया तो बातचीत की प्रगति पर असर पड़ सकता है.

इस समझौते के बाद अब तुर्की यूरोपीय संघ की नीतियों के पहले और सबसे आसान 'अध्याय' को पूरा करने की ओर आगे बढ़ गया है. यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए इसे पूरा करना होता है.

यूरोपीय संघ की नीति का पहला अध्याय विज्ञान और तकनीक से जुड़ा हुआ है. 1974 से विभाजित होने के बावजूद मई 2004 में साइप्रस यूरोपीय संघ में शामिल हुआ था.

1974 में साइप्रस में विद्रोह हुआ, जिसे ग्रीस की सैनिक सरकार (जुंटा) का समर्थन था. इसके जवाब में तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर हमला कर एक तिहाई हिस्से पर अपना क़ब्ज़ा कर लिया.

बाक़ी के दो तिहाई हिस्से पर ग्रीस का प्रभाव है. तुर्की का कहना है कि साइप्रस को मान्यता देने की बात संयुक्त राष्ट्र की शांति योजना से जुड़ी हुई है. जिसमें दोनों हिस्सों को मिलाने की बात कही गई है.

वर्ष 2004 में इस प्रस्ताव को तुर्की के क़ब्ज़े वाले हिस्से ने तो स्वीकार कर लिया लेकिन ग्रीक के प्रभाव वाले हिस्से ने इसे अस्वीकार कर दिया.