शुक्रवार, 09 जून, 2006 को 12:37 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान से मिली ख़बरों में कहा गया है कि तालेबान के नेता मुल्ला मोहम्मद उमर का कहना है कि इराक़ में अबू मुसाब अल ज़रक़ावी की मौत से अफ़ग़ानिस्तान में पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ चल रहा अभियान कमज़ोर नहीं पड़ेगा.
ग़ौरतलब है कि इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने गुरूवार को घोषणा की थी कि अल क़ायदा के नेता ज़रक़ावी बुधवार की रात को बक़ूबा के निकट एक स्थान पर किए गए एक हवाई हमले में मारे गए.
तालेबान नेता मुल्ला मोहम्मद उमर की तरफ़ से एक बयान जारी हुआ है जिसमें ज़रक़ावी की मौत पर शोक व्यक्त किया गया है और उन्हें 'शहीद' कहकर पुकारा गया है.
यह बयान समाचार एजेंसियों को तालेबान के प्रवक्ता मोहम्मद हनीफ़ ने सेटेलाइट फ़ोन के ज़रिए पढ़कर सुनाया.
बयान में कहा गया है, "मैं दुनिया भर के मुसलमानों को एक शुभ समाचार देता हूँ, अफ़ग़ानिस्तान और अन्य इस्लामी देशों में पश्चिमी ताक़तों के ख़िलाफ़ जिहाद कमज़ोर नहीं पड़ेगा."
तालेबान प्रवक्ता ने मुल्ला उमर का बयान पढ़कर सुनाया कि अफ़ग़ानिस्तान में जिहाद में शामिल सभी भाई-बंधु ज़रक़ावी की मौत पर दुखी हैं.
बयान के अनुसार, "ज़रक़ावी की मौत की वजह से इराक़ में जिहाद कमज़ोर नहीं पड़ेगा. बहुत से अन्य युवक ज़रक़ावी बन सकते हैं और वे ज़रक़ावी से भी ज़्यादा मज़बूत साबित हो सकते हैं."
काबुल में बीबीसी संवाददाता बिलाल सरवरी का कहना है कि ज़रक़ावी और मुल्ला उमर एक दूसरे को 1990 से जानते थे जब उमर ने पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान में एक प्रशिक्षण शिविर स्थापित किया था.
अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने गुरूवार को कहा था कि ज़रक़ावी इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में हज़ारों लोगों की मौत के लिए ज़िम्मेदार थे.
ज़रक़ावी ने अफ़ग़ानिस्तान में भी सोवियत सेनाओं के ख़िलाफ़ लड़ाई में कुछ वक़्त गुज़ारा था.
फिर जब तालेबान सत्ता में आए थे तो ज़रक़ावी फिर से अफ़ग़ानिस्तान पहुँचे थे और अक्तूबर 2001 में अमरीकी हमले के बाद से वह अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकल गए थे.
बाद में भी ज़रक़ावी ने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी और अन्य विदेशी ताक़तों के ख़िलाफ़ लड़ने वाले चरमपंथियों को सहायता देना जारी रखा था.