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शुक्रवार, 09 जून, 2006 को 04:16 GMT तक के समाचार

ज़रक़ावी की मौत के बाद बग़दाद में कर्फ़्यू

ख़बरें हैं कि इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने बग़दाद और बक़ूबा शहरों में दिन के समय वाहनों के आवागमन पर आंशिक प्रतिबंध लगा दिया है.

माना जा रहा है कि यह क़दम इराक़ी चरमपंथी अबू मुसाब अल ज़रक़ावी के मारे जाने के बाद जवाबी हमलों की आशंका के मद्देनज़र उठाया गया है.

इराक़ के सरकारी टीवी ने ख़बर दी है कि यह प्रतिबंध शुक्रवार को दिन में कई घंटे लागू रहेगा. इस दौरान बड़ी संख्या में इराक़ी मस्जिदों में नमाज़ पढ़ने जाते हैं.

ग़ौरतलब है कि जॉर्डन मूल के चरमपंथी अबू मुसाब अल-ज़रक़ावी बुधवार शाम इराक़ी शहर बक़ूबा के पास एक हवाई हमले में मारे गए थे.

इधर इराक़ी और अमरीकी सरकारों ने अबू मुसाब अल ज़रक़ावी के मारे जाने को इराक़ में अल-क़ायदा के लिए एक बड़ा झटका बताया है.

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि अल ज़रकावी की मौत इराक की नई सरकार के लिए समय का रूख मोड़ने में सहायक हो सकती है.

बुश और ब्लेयर ने ख़ुशी व्यक्त की

इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने गुरूवार को राजधानी बग़दाद में आयोजित एक पत्रकारवार्ता में ज़रक़ावी के मारे जाने की घोषणा की थी. लेकिन कुल मिलाकर राष्ट्रपति बुश की प्रतिक्रिया सावधानी भरी थी.

उन्होंने सबको सावधान किया कि हालांकि ज़रक़ावी की मौत चरमपंथ के ख़िलाफ लड़ाई में एक बड़ी जीत है, लेकिन अब भी इराक के लिए आने वाले दिन ख़तरे से भरे हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति ने आगे की योजना बनाने के लिए इराकी नेताओं के साथ एक वार्ता की भी घोषणा की.

व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा है कि भविष्य में चरमपंथी हमलों में वृद्धि हो सकती है क्योंकि चरमपंथी ये ज़रूर दिखाना चाहेंगे कि वे अब भी सक्रिय हैं.

उधर इराक़ में सैनिक कार्रवाई में अमरीका के निकट सहयोगी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा कि ज़रक़ावी की मौत से इराक़ में हिंसा का दौर थमने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

मध्य पूर्व में प्रतिक्रिया

उधर पूरे मध्य-पूर्व के मीडिया में अल ज़रकावी की मौत सुर्खियों में रही.

इराक़ में टीवी चैनल पर लोगों को सड़कों पर खुशियां मनाते हुए दिखाया गया, वहीं नेताओं ने इसे नए दौर की शुरूआत बताया.

ज़रक़ावी का जीवन

काफी समय से अरब देशों के मीडिया में ज़रक़ावी का वर्णन इराक के ऊपर मंडराती एक काली छाया की तरह किया जाता रहा है.

ज़रक़ावी पर ढाई करोड़ डॉलर का इनाम था

सरकारी चैनल अल-इराक़िया पर दिखाया गया कि कैसे लोगों ने उसके मारे जाने पर संतोष व्यक्त किया.

कुछ अरब विश्लेषकों ने ये भी कहा कि ज़रकावी की मौत अल क़ायदा के लिए अपनी तस्वीर बदलकर एक नए नेतृत्व को तैयार करने का सुनहरा मौक़ा भी हो सकती है.

अरब टीवी चैनलों ने ज़रकावी की जीवनी और उनके बुरे कारनामों का सिलसिलेवार ब्येरा दिया, वहीं इस्लामी वेबसाइटों पर उन लोगों के लिए नफ़रत भरे पैगाम थे, जिन्होंने ज़रकावी को मौत के घाट उतारा.

प्रमुख चरमपंथी

मुसाब अल ज़रक़ावी को इराक़ में अमरीकी सेना के ख़िलाफ़ लड़ने वाले अल क़ायदा छापामारों का सबसे बड़ा नेता माना जाता है.

जॉर्डन के अल ज़रका शहर से ताल्लुक रखने वाले अबू मुसाब को अहमद अल ख़लील के नाम से भी जाना जाता है.

ज़रक़ावी को अमरीकी सैनिकों ने इराक़ में 'मोस्ट वांटेड' की सूची में सबसे ऊपर रखा था.
ज़रक़ावी को कई आत्मघाती बम हमलों और विदेशी नागरिकों के अपहरण और हत्या का दोषी ठहराया जाता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इराक़ी चरमपंथियों के बीच ज़रक़ावी का सिक्का चलता था और कई चरमपंथी उन्हें प्रेरणास्रोत के रूप में देखते थे.

अब तक ज़रक़ावी को पकड़ने की हर अमरीकी कोशिश नाकाम रही थीं. कई बार घिर जाने के बाद भी ज़रक़ावी हाथ नहीं आए थे.

जॉर्डन ने ज़रक़ावी की ग़ैर मौजूदगी में उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाकर उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी.

ज़रक़ावी का कार्यक्षेत्र सिर्फ़ इराक़ रहा हो ऐसा नहीं है, मोरक्को और तुर्की में हुई कई चरमपंथी घटनाओं के लिए उन्हें ज़िम्मेदार माना जाता है.