गुरुवार, 08 जून, 2006 को 14:22 GMT तक के समाचार
इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने घोषणा की है कि इराक़ में अल क़ायदा की गतिविधियाँ चलाने वाले अबू मुसाब अल ज़रक़ावी एक हवाई हमले में मारे गए हैं.
प्रधानमंत्री मलिकी ने राजधानी बग़दाद में आयोजित एक पत्रकारवार्ता में ज़रक़ावी के मारे जाने की घोषणा की. उनका कहना था कि इराक़ी लोगों के सहयोग से उन्हें मारा जा सका.
इस घोषणा के दौरान उनके साथ इराक़ में अमरीकी राजदूत खलीलज़ाद और विदेशी सेनाओं के संयुक्त कमांडर अमरीकी जनरल जॉर्ज केसी भी मौजूद थे.
इराक़ी प्रधानमंत्री ने कहा कि ज़रक़ावी का मारा जाना सभी के लिए संदेश है कि हिंसा और तबाही के रास्ते पर चल रहे लोग इससे बाज आएँ.
अमरीकी जनरल केसी ने कहा कि ज़रक़ावी उत्तरी बक़ूबा से आठ किलोमीटर दूर एक हवाई हमले में मारे गए और उनकी पहचान उंगलियों के निशान और चेहरे से की गई.
अमरीकी राजदूत का कहना था कि ज़रक़ावी का मारा जाना इराक़ में चरमपंथी गतिविधियों के ख़िलाफ़ संघर्ष में एक बड़ी सफलता है.
उन्होंने ज़रक़ावी को जातीय हिंसा भड़काने का ज़िम्मेदार बताया है और कहा कि इससे इराक़ में हिंसा ख़त्म तो नहीं होगी लेकिन उसे ख़त्म करने की दिशा में यह एक अच्छा क़दम है.
बड़े चरमपंथी नेता
मुसाब अल ज़रक़ावी को इराक़ में अमरीकी सेना के ख़िलाफ़ लड़ने वाले अल क़ायदा छापामारों का सबसे बड़ा नेता माना जाता है.
जॉर्डन के अल ज़रका शहर से ताल्लुक रहने वाले अबू मुसाब को अहमद अल ख़लील के नाम से भी जाना जाता है.
ज़रक़ावी को अमरीकी सैनिकों ने इराक़ में 'मोस्ट वांटेड' की सूची में सबसे ऊपर रखा था.
ज़रक़ावी को कई आत्मघाती बम हमलों और विदेशी नागरिकों के अपहरण और हत्या का दोषी ठहराया जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि इराक़ी चरमपंथियों के बीच ज़रक़ावी का सिक्का चलता था और कई चरमपंथी उन्हें प्रेरणास्रोत के रूप में देखते थे.
अब तक ज़रक़ावी को पकड़ने की हर अमरीकी कोशिश नाकाम रही थीं. कई बार घिर जाने के बाद भी ज़रक़ावी हाथ नहीं आए थे.
जॉर्डन ने ज़रक़ावी की ग़ैर मौजूदगी में उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाकर उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी.
ज़रक़ावी का कार्यक्षेत्र सिर्फ़ इराक़ रहा हो ऐसा नहीं है, मोरक्को और तुर्की में हुई कई चरमपंथी घटनाओं के लिए उन्हें ज़िम्मेदार माना जाता है.