शुक्रवार, 02 जून, 2006 को 12:36 GMT तक के समाचार
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कई देशों में जारी महिला ख़तना की प्रथा की निंदा करते हुए इसे महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए घातक करार दिया है.
डब्लूएचओ की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ ख़तना के कारण प्रजनन के समय महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी कई पेचीदगियों का सामना करना पड़ता है और नवजात शिशु भी इससे प्रभावित हो सकता है.
ख़तना में महिलाओं के जननांग के एक अहम हिस्से को चिकित्सा पद्धति के मान्य सिद्धांतों के विपरीत हटा दिया जाता है.
और अभी भी कई देशों में महिला ख़तना एक प्रथा के रुप में जारी है.
रिपोर्ट के मुताबिक़ अभी दुनिया के 28 देशों में ख़तना प्रथा का चलन क़ायम है जिनमें अधिकांश अफ्रीका के देश हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में लगभग दस करोड़ महिलाओं को ख़तना के दौरान अपनाई जाने वाली पीड़ादायक प्रक्रिया से दो चार होना पड़ा है.
इनमें से 30 लाख लड़कियों को दस वर्ष से कम उम्र में ही इस अनुभव से ग़ुजरना पड़ा.
मान्यता
डब्लूएचओ के अनुसार मुख्य तौर पर कुछ मुस्लिम और ईसाई समुदायों में इस प्रथा का प्रचलन है जो मानते हैं कि ख़तना से लड़कियों को अपनी अस्मिता या कौमार्य बरकरार रखने में मदद मिलती है.
नई रिपोर्ट के अनुसार ख़तना के दौरान असहनीय दर्द के साथ साथ गंभीर संक्रमण का भी ख़तरा होता है और भविष्य में इसके कारण कई बीमारियाँ घर कर सकती है.
छह अफ्रीकी देशों की लगभग 30 हज़ार महिलाओं पर किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि जिनका ख़तना हुआ था उन्हें प्रजनन के दौरान काफ़ी समस्या हुई और ऐसे बच्चों का मृत्यु दर ख़तना नहीं कराने वाली महिलाओं के बच्चों की तुलना में 55 प्रतिशत अधिक था.
डब्लूएचओ का मानना है कि ब्रिटेन में भी वहाँ बस गए कई आप्रवासी अपनी लड़कियों को ख़तना के लिए निजी अस्पतालों में भेजते हैं.
रिपोर्ट में ख़तना को किसी समस्या के समाधान के बज़ाए चिकित्सा पद्धति का अपराधीकरण बताया गया है.
कई अफ्रीकी देशों ने इस पर रोक लगाने के लिए बक़ायदा कानून बनाया है लेकिन डब्लूएचओ के अनुसार इन कानूनों का पालन सख़्ती से नहीं हो पा रहा है.