शुक्रवार, 26 मई, 2006 को 01:10 GMT तक के समाचार
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इराक़ की नई सरकार का समर्थन करें.
अमरीका के दौरे पर गए प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने गुरुवार को राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से मुलाक़ात की.
मुलाक़ात के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रपति बुश ने एक बार फिर इराक़ पर हमला करने के फ़ैसले को सही बताया. हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें कई कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा.
प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा, "यह हमारा कर्तव्य है और हमारा ही नहीं पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का कर्तव्य है कि हम इराक़ की नई सरकार का समर्थन करें."
ब्रितानी प्रधानमंत्री ब्लेयर ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि इराक़ी नेता यह जान लें कि अमरीका और ब्रिटेन विरोधी शक्तियों को हराने के लिए उनके साथ खड़े हैं.
वापसी का सवाल
शुक्रवार को भी राष्ट्रपति बुश और प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की बातचीत जारी रहेगी. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि इराक़ में अब लोकतांत्रिक सरकार है और अब वहाँ के लोग स्वतंत्रता महसूस कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा कि इराक़ में अब हिंसा की कोई वजह नहीं है. दोनों नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि अमरीकी और ब्रितानी सैनिक इराक़ की स्थिति ठीक होने तक वहाँ से वापस नहीं आएँगे.
उन्होंने कहा कि सैनिकों की वापसी के लिए समयसीमा तय नहीं की जा सकती.
राष्ट्रपति बुश और प्रधानमंत्री ब्लेयर ने ईरान मामले पर भी चर्चा की. ईरान को अपना यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम रोकने के बदले पैकेज देने के बारे में भी चर्चा हुई.
राष्ट्रपति बुश ने कहा कि अगर ईरान यूरेनियम संवर्द्धन का कार्यक्रम रोक देता है, तो उसे पैकेज देने पर विचार किया जा सकता है.
अमरीका का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर रहा है. लेकिन ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.
राष्ट्रपति बुश ने माना कि अबू ग़रेब जेल में क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार सबसे बड़ी ग़लती थी. उन्होंने कहा, "अभी तक जो सबसे बड़ी ग़लती हुई है, वह अबू ग़रेब का मामला था. हमें लंबे समय तक इसका परिणाम भुगतना पड़ा था."
उन्होंने इराक़ युद्ध के समय कुछ कड़े बयान पर भी खेद व्यक्त किया. दूसरी ओर प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा कि सद्दाम हुसैन को हटाए जाने के बाद जिस तरह बाथ पार्टी के सदस्यों से इराक़ को मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू हुई, वो भी एक ग़लती थी.