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शुक्रवार, 26 मई, 2006 को 08:18 GMT तक के समाचार

बेसलान हमलावर को उम्र क़ैद की सज़ा

रूस में सितंबर 2004 में हुए बेसलान बंधक कांड मामले से जुड़े एकमात्र जीवित संदिग्ध व्यक्ति को क़त्ल और चरमपंथ का दोषी पाया गया है.

चेचन्या में बढ़ई का काम करने वाले नूर-पाशी कुलायेव को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.

ये फ़ैसला रूस की एक अदालत ने सुनाया.

जजों ने कहा कि कुलायेव को मौत की सज़ा मिलनी चाहिए लेकिन ये रूस में संभव नहीं है इसलिए उन्हें उम्र क़ैद की सज़ा दी गई है.

बेसलान बंधक कांड में जिन लोगों ने अपने रिश्तेदारों को खोया है वे लोग कुलायेव को मौत की सज़ा दिए जाने की माँग कर रहे थे.

कुलायेव ने बंधक कांड में हिस्सा लेने की बात स्वीकार की थी पर साथ ही कहा था कि उन्होंने किसी को मारा नहीं था.

कुलायेव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया था.

अदालत में जज अगुज़ारोव ने कहा कि कुलायेव की गतिविधियाँ कुछ हद तक 16 बंधकों की मौत का कारण बनीं और कुलायेव ने एक नंबर स्कूल में बम विस्फोट किया था जिससे बंधक और सैनिक घायल हो गए थे.

एपी के मुताबिक कुलायेव को उन बच्चों और अन्य बंधकों को गोली मारने का भी दोषी पाया गया जिन्होंने बंधक संकट के तीसरे दिन स्कूल से भागने की कोशिश की थी.

सवाल बरकरार

बेसलान में वर्ष 2004 में करीब 32 विद्रोहियों ने वहाँ के एक स्कूल में करीब 1000 बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को तीन दिन तक बंधक बना कर रखा था.

बेसलान बंधक कांड में 330 से ज़्यादा लोगों की जान गई थी. इस मामले में करीब एक साल से मुक़दमा चल रहा था.

विद्रोहियों और रूसी सैनिकों के बीच संघर्ष के बाद जब बंधक संकट ख़त्म हुआ था तो कुलायेव को स्कूल के पास एक लॉरी के नीचे छिपा हुआ पाया गया था. उस समय वे लोगों से पिटते-पिटते बचे थे.

जब कुलायेव को अदालत से ले जाया जा रहा था तो बेसलान पीड़ितों के कुछ परिवारों ने उन पर हमला करने की कोशिश की.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बेसलान में कई लोगों के मन में अब भी ये सवाल बने हुए हैं कि इतनी बड़ी संख्या में हथियारबंद विद्रोही कैसे नाकों से गुज़र पाए और स्कूल में लोगों को बंधक बना लिया.

संवाददाता के मुताबिक कई लोगों को लगता है कि अधिकारियों की लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए कई तथ्यों को छिपाया जा रहा है.