फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा है कि उनके फ़तह संगठन और हमास के बीच 10 दिनों के अंदर सुलह नहीं हुई तो वह जनमत संग्रह कराएँगे.
उन्होंने कहा कि जनमत संग्रह में फ़लीस्तीनियों से यह पूछा जाएगा कि क्या वे इसराइल के साथ लगे पश्चिमी तट, गज़ा पट्टी और पूर्वी येरुशलम में एक फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के पक्ष में हैं.
अब्बास ने कहा कि इसके लिए जनता की स्वीकृति के लिए इसराइली जेलों में बंद वरिष्ठ फ़लस्तीनी नेताओं द्वारा स्वीकृत 18-सूत्री योजना प्रस्तुत की जाएगी.
इस योजना पर सहमति देने वालों में अन्य दलों के अलावा फ़तह और हमास के कुछ नेता भी शामिल हैं.
इसमें 1967 में इसराइल के क़ब्ज़ा किए गए इलाक़े में एक स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना और फ़लस्तीनी शरणार्थियों के इसराइल स्थित अपने घरों में वापस लौटने के अधिकार जैसी बात शामिल है. उल्लेखनीय है कि 1948 में इसराइल की स्थापना के बाद हज़ारों फ़लस्तीनी पलायन करने को बाध्य हो गए थे.
'ख़तरनाक स्थिति'
अब्बास ने गुरुवार को कहा, "स्थिति ख़तरनाक होती जा रही है. पूरा राष्ट्र ख़तरे में है. हम बाक़ी लोगों के जान गँवाने का इंतज़ार नहीं कर सकते."
फ़लस्तीनी नेता ने कहा, "जनता के पास जाना लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है."
अब्बास ने मुख्य फ़लस्तीनी धड़ों के बीच असहमति दूर करने और हिंसा पर रोक लगाने के उद्देश्य से आयोजित एक सम्मेलन में यह चेतावनी दी.
फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रमुख अब्बास ने इस बात से इनकार किया है कि उन्होंने हमास को सीधी चुनौती देने के लिए यह ऐलान किया है.
फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने जनमत संग्रह के विचार का स्वागत किया है. जनमत संग्रह का आयोजन 40 दिनों के भीतर किया जाना है.
उल्लेखनीय है कि हमास इसराइल को मान्यता नहीं देता है. इसके विपरीत फ़तह इसराइल के अस्तित्व को स्वीकार करता है.