बुधवार, 24 मई, 2006 को 15:37 GMT तक के समाचार
फ़लस्तीनी सरकार में सत्तारूढ़ दल हमास ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की यह कहने के लिए आलोचना की है कि अगर शांति वार्ता नाकाम होती है तो इसराइल इकतरफ़ा तौर पर सीमाएँ फिर से तय कर सकता है.
हमास के एक प्रवक्ता ने कहा है कि अगर ऐसा होता है तो इससे फ़लस्तीनियों के हितों को भारी नुक़सान होगा.
जॉर्ज बुश ने इसराइली प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट से वाशिंगटन में बातचीत के बाद कहा है कि सीमाएँ तय करने के बारे में इसराइली योजना 'साहसिक' है लेकिन साथ ही उन्होंने ओलमर्ट से अनुरोध किया कि वे फ़लस्तीनियों के साथ सीधी बातचीत के लिए कोशिश करें.
बुश ने कहा कि फ़लस्तीनियों के साथ अगर बातचीत नाकाम साबित होती है तो अमरीका इस योजना को समर्थन दे सकता है.
ओलमर्ट ने कहा कि वह बुश की प्रतिक्रिया से बहुत संतुष्ट हैं. उन्होंने कहा कि इकतरफ़ा तौर पर इसराइल की सीमाएँ फिर से तय करने की योजना पर अमल करने से पहले वह द्विपक्षीय बातचीत के लिए सभी विकल्पों को आज़माएंगे.
ओलमर्ट ने कहा कि वह फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से भी मुलाक़ात करेंगे.
इसराइल, अमरीका और यूरोपीय संघ हमास को एक चरमपंथी संगठन मानते हैं. हमास ने जनवरी 2006 में फ़लस्तीनी प्रशासन के लिए हुए चुनावों में जीत हासिल की थी और सरकार बनाई है.
हमास इसराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता है और वह हिंसा का रास्ता छोड़ने की माँग भी ठुकरा चुका है.
एहूद ओलमर्ट की योजना के अनुसार पश्चिमी तट में कुछ अलग-थलग सी यहूदी बस्तियों से तो लोगों को हटाने का प्रस्ताव है लेकिन कुछ अन्य स्थानों पर ऐसी यहूदी बस्तियों को बसाना है जहाँ सैकड़ों लोग रहते हैं.
फ़लस्तीनियों का इस योजना के बारे में कहना है कि इसराइल ने 1967 में जिस ज़मीन पर क़ब्ज़ा किया था, यह योजना उसी ज़मीन को हथियाने की एक साज़िश है.
फ़लस्तीनी कहते हैं कि इस योजना को अगर लागू किया जाता है तो फ़लस्तीनियों के पास एक देश की स्थापना के लिए समुचित ज़मीन नहीं बचेगी.
उनका आरोप है कि एहूद ओलमर्ट बातचीत के बारे में गंभीर नहीं हैं.