सोमवार, 22 मई, 2006 को 23:09 GMT तक के समाचार
भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चुनाव के लिए सुरक्षा परिषद तीन नाम छाँटकर संयुक्त राष्ट्र महासभा को दे जिसके बाद महासभा ही महासचिव का चुनाव करे.
विकासशील देशों के कूटनयिकों का कहना है कि इस तरह संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों को अगले महासचिव की चयन प्रक्रिया में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा.
कूटनयिकों के मुताबिक इससे ये भी सुनिश्चित होगा कि अगला महासचिव सिर्फ़ वो काम ही करने को मजबूर नहीं होगा जो दुनिया के शक्तिशाली देश चाहते हैं.
बीबीसी संवाददाता लॉरा ट्रेवलिन का कहना है कि विकासशील देशों में इस बात को लेकर काफ़ी असंतोष है कि कोफ़ी अन्नान के उत्तराधिकारी का चयन सुरक्षा परिषद करेगी.
विरोध
लेकिन संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बोल्टन ने इस सुझाव को सिरे से नकार दिया है.
जॉन बोल्टन ने कहा कि ने कहा है कि इस तरह के क़दम से संयुक्त राष्ट्र के चार्टर को लेकर विवाद पैदा हो जाएगा.
उन्होंने कहा कि महासभा सुरक्षा परिषद को ये नहीं कह सकती कि कोई भी कार्यवाही कैसी करनी चाहिए और चार्टर इसकी सारी ज़िम्मेदारी सुरक्षा परिषद को देता है.
जॉन बोल्टन ने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि भारत इस क़दम को आगे नहीं बढ़ाएगा क्योंकि इससे संयुक्त राष्ट्र में चली आ रही 60 साल पुरानी कार्य
पद्धति उलटी पड़ जाएगी.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि भारत के सुझाव का विरोध करने में जॉन बोल्टन अकेले नहीं है.
कई कूटनयिकों का मानना है कि अगले महासचिव के लिए होने वाले चुनाव में मतभेद उभर कर आएँगे.
लेकिन भारत का सुझाव दर्शाता है कि कोफ़ी अन्नान के उत्तराधिकारी की चयन प्रक्रिया में शामिल होने को लेकर विकासशील देश गंभीर हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर महासभा भारत के सुझाव के आधार पर कोई प्रस्ताव पारित करती है, तो इससे सुरक्षा परिषद के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो जाएगी.
संवाददाता के मुताबिक ये विवाद संयुक्त राष्ट्र में अमीर और ग़रीब देशों के बीच विवाद की ताज़ा मिसाल है.
कोफ़ी अन्नान इस साल के अंत तक अपना पद नहीं छोड़ेगें लेकिन सुरक्षा परिषद में निजी स्तर पर उनके उत्तराधिकारी के चयन को लेकर बातचीत शुरू हो गई है.