शनिवार, 20 मई, 2006 को 17:47 GMT तक के समाचार
चीन में अधिकारियों ने यांग्त्से नदी पर विवादास्पद बांध के पूरा होने की घोषणा कर दी है जो दुनिया की सबसे बड़ी पन-बिजली परियोजना के लिए बनाया गया है.
इस बाँध की दीवार पक्के सीमेंट से बनाई गई है जो दो किलोमीटर लंबी है. इस दीवार का पूरा होना चीन में बनने वाली दुनिया की सबसे बड़ी पन-बिजली परियोजना का महत्वपूर्ण पड़ाव है.
अधिकारियों ने कहा है कि यह परियोजना 2008 में पूरी हो जाएगी. इस परियोजना का उद्देश्य चीन की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए बिजली की ज़रूरत पूरी करना और बाढ़ के ख़तरे को कम करना है.
साथ ही चीन के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में नदी के ज़रिए परिवहन व्यवस्था को भी सुधारने का मक़सद है.
लेकिन इस परियोजना ने एक विवाद भी खड़ा कर दिया है. बाढ़ वाले इलाक़े से लगभग दस लाख लोगों को विस्थापित किया गया है और उनमें से बहुत से लोगों ने शिकायत की है कि उनकी मुआवज़ा राशि भ्रष्ठ अधिकारियों ने हड़प ली है.
इस परियोजना के आलोचकों का कहना है कि यह बाँध भूकंप के लिए बहुत संवेदनशील है.
थ्री गोर्जेज़ बाँध
पहाड़ों से घिरे चोंकिंग नामक स्थान पर इस परियोजना का निर्माण हुआ है. वहाँ दो बडी नदियों जीयालिंग और यांग्त्से का संगम होता है. सन् 2009 तक पूर्ण रूप से सक्रिय होने के बाद चोकिंग और आसपास की लगभग एक करोड़ की आबादी को इस बाँध से अभूतपूर्व फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है.
अतिरिक्त बिजली के उत्पादन के अलावा नदी यातायात को भी व्यवस्थित करने में इससे बहुत मदद मिलेगी. चीन के दक्षिण पश्चिमी भागों में स्थित औध्योगिक क्षेत्रों तक चोंकिंग से जहाज़ों की आवाजाही में काफी आसानी हो जाएगी.
वैसे अधिकारियों की योजना भी चोंकिंग को एक प्रमुख शिपिंग चैनल यानी बंदरगाह क्षेत्र के रूप में विकसित करने की है.
चोंकिंग विश्विद्यालय के अर्थशास्त्र के प्रोफैसर यौंगजियान बताते हैं कि इस बाँध से औद्योगिक स्तर पर क्या फायदे होने वाले हैं, "थ्री गोर्जेज़ जल भंडार, थ्री गोर्जेज़ बाँध के अलावा यांग्त्से नदी यातायात के इस्तेमाल से हम देश के विभिन्न भागों में उत्पादन के लिए कच्चा माल और अपने यहाँ उत्पादित वस्तुओं को अपेक्षाकृत कम लागत में पहुंचा सकेंगे."
एक तरफ जहाँ थ्री गोर्जेज़ बाँध से देश की अर्थव्यवस्था के तेज़ी से विकास की बात कही जा रही है, वहीं दुनिया के इस सबसे बड़े बाँध ने लगभग 10 लाख लोगों को बेघर बार भी कर दिया है. और अभी लगभग 80 हज़ार और लोगों को इलाके से हटाया जाना बाक़ी है.
कुछ अनुमान ऐसे हैं कि कम से कम 12 गांव और दो बड़े शहर इस बाँध परियोजना के रास्ते में आए, जिनका पुनर्निर्माण करना पड़ा. पर्यावरण संस्थाओं ने भी इस बाँध के विरोध में समय-समय पर अपनी आवाज़ उठाई.
फ्रैंड्स ऑफ अर्थ नाम की प्रयावरण संस्था ने इस परियोजना पर पहले ही कई बार आपत्ति उठाई थी, जिसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया.
संस्था की फ्रांसीसी शाखा के पदाधिकारी सबैश्चियन गौडिनोट का बांध से पैदा हुई समस्याओं के बारे में कहना था, "कई बड़ी समस्याएँ हैं. पहली ये कि बाँध से ज़मीन का एक बहुत बड़ा भाग डूब कर नष्ट हो जाएगा और, जिसके बहुत बुरे पर्यावरणीय नुकसान होंगे."
"दूसरे बाँध की ज़द में लगभग 13 शहर और 4 हज़ार से ज्यादा गाँव आएंगे जिनके लगभग 20 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा और उन्हें अन्य जगहों पर ले जाकर बसाना पड़ेगा. तीसरे इस बांध परियोजना में भ्र्ष्टाचार की वजह से बजट 50 फ़ीसदी और बढ़ाना पडा है."
डूब प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सरकार ने मुआवज़ा देने के वादे के साथ उनके लिए नए घर और नए रोज़गार उपल्ब्ध कराने की बात कही थी लेकिन इसका व्यवहारिक रूप काफी विवादित रहा.
कई परिवारों की शिकायतें आईं कि मुआवज़े की ज़्यादातर रक़म और कुछ मामलों में तो सारी की सारी रक़म भ्रष्ट अधिकारियों के खाते में पहुँच गई और विस्थापितों तक नहीं पहुँची.