मंगलवार, 16 मई, 2006 को 03:49 GMT तक के समाचार
न्यूज़ीलैंड के मार्क इंगलिस पर्वतारोहण के दौरान हुई एक दुर्घटना में अपने दोनों पैर खो चुके थे. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर विजय हासिल कर ली.
इसके लिए उन्होंने अपने कृत्रिम पैरों का सहारा लिया.
47 साल के मार्क इंगलिस, दोनों पैर न होने के बाद भी दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ने वाले पहले व्यक्ति हैं.
अपनी पत्नी एने को मार्क इंगलिस ने फ़ोन पर बताया कि वे सोमवार को एवरेस्ट शिखर पर पहुँचे और फिर बेस कैंप-4 तक लौट आए हैं.
एने ने पत्रकारों से हुआ चर्चा में कहा कि आपातस्थिति के लिए मार्क अपने साथ कृत्रिम पैरों की एक जोड़ी और ले गए थे लेकिन इसकी ज़रुरत ही नहीं पड़ी.
प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क ने इस उपलब्धि के लिए मार्क इंगलिस को बधाई दी है.
बुलंद हौसले
पर्वतारोहण के दौरान हुई एक दुर्घटना में मार्क घुटनों के नीचे दोनों पैर 1982 में खो चुके हैं.
उनके दोनों पैर बर्फ़ में गल गए थे.
जब दुर्घटना हुई तो वे न्यूज़ीलैंड की सबसे ऊँची चोटी माउंट कुक पर चढ़ाई कर रहे थे.
एकाएक मौसम ख़राब हुआ और उन्हें अपने एक और साथी के साथ दो हफ़्ते बर्फ़ की एक गुफ़ा में बितानी पड़ी.
जब उन्हें बचाव दल ने वहाँ से निकाला तो वे किसी तरह जीवित बचे थे.
लेकिन इससे उनके बुलंद हौसलों पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा.
वे स्कीइंग के गाइड बने रहे, और सिडनी में विकलांगों की ओलंपिक में साइकिल चालन में रजत पदक जीता.
उन्होंने 2004 में तिब्बत में 8,201 मीटर ऊँची चोटी माउँट चो आयू पर चढ़ाई की थी.
कोई 40 दिनों पहले ही उन्होंने माउँट एवरेस्ट पर चढ़ाई शुरु की.
उनकी पत्नी एने ने बताया कि सोमवार को अच्छे मौसम के बीच उन्होंने एवरेस्ट पर जीत हासिल की.
उनका कहना था कि इस उपलब्धि पर मार्क बेहद ख़ुश थे.
एवरेस्ट पर जाने से पहले समाचार एजेंसी एएफ़पी को दिए साक्षात्कार में मार्क ने कहा था, "मैं इसलिए ये नहीं कर रहा हूँ कि बिना पैरों के ऐसा करने वाला मैं पहला ऐसा व्यक्ति हो जाउँगा."
उन्होंने कहा, "अगर ऐसा कर लेता हूँ तो यह केक पर आईसिंग की तरह होगा. मैं अपने पूरे जीवन पहाड़ों की चढ़ाई करता रहा हूँ और एवरेस्ट पर जीत ही एक उपलब्धि होगी."
मार्क ने कहा था कि ऐसी जीत आदमी को दूसरे कार्य करने के लिए सामर्थ्य का ज्ञान देती है.