शनिवार, 13 मई, 2006 को 17:28 GMT तक के समाचार
इंडोनेशिया में शनिवार, 13 मई 2006 को माउंट मेरापी में ज्वालामुखी से लावा निकलने की वजह से आसपास के इलाक़ों में रहने वाले लोगों को कहीं और चले जाने का आदेश दिया गया.
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि माउंट मेरापी ज्वालामुखी के फटने के आसार काफ़ी ज़्यादा हैं और इस चेतावनी को सबसे उच्च श्रेणी की चेतावनी के तहत रखा गया है.
आपातकालीन सेवा के तहत हज़ारों ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानो पर पहुँचाने की कोशिश की जा रही है लेकिन अपने खेतों और घरों से दूर जाने का निर्णय स्थानीय लोगों के लिए आसान नहीं है.
अधिकारिक रूप से इंडोनेशिया में मुसलमानों की संख्या सबसे ज़्यादा है लेकिन जावा प्रांत के बहुत से लोग इस्लाम धर्म से भी पहले की आस्थाओं को मानते है और उनकी नज़र में मेरापी पर्वत आस्था के महत्वपूर्ण प्रतीको में से एक है.
बहुत से ग्रामीण जो इस ज्वालामुखी के आसपास के इलाक़े में रहते हैं उनका मानन है कि इसकी चोटी पर एक पवित्र राज्य है जो जीवन यात्रा के अंतिम पडाव को प्रदर्शित करता है.
उनकी आस्था के अनुसार अगर ज्वालामुखी में विस्फोट होता है तो वो आध्यात्मिक शक्तियों की तरफ़ से किया गया होगा जो एक अशुभ संकेत देता है, ख़ासतौर से राजनीतिक क्षेत्र में.
ऐसे में ये लोग प्रशासन की और से जारी की गयी चेतावनियो पर ध्यान नहीं देकर वहीं रहना चाहते है.
इस इलाक़े में रहने वाले 80 साल के मरीजान के बारे में कहा जाता है कि उन्हें ज्वालामुखी के व्यवहार को समझने की आलौकिक शक्ति है और उन्होंने वहाँ से नहीं हटने का फैसला किया है.
यही कारण है कि अन्य लोग भी यहाँ से कहीं और नहीं जाना चाहते और ऐसे मे प्रशासन को गाँव ख़ाली कराने में दिक्कते पेश आ रही है.
अब प्रशासन ने योजना बनाई है कि मरीजान को ज़बरदस्ती सुरक्षित स्थान पर ले जाकर एक आरामदेह होटल में ठहराया जाए ताकि बाकी लोग भी गाँव छोड कर जा सके.
लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए सेना के ट्रकों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
वैज्ञानिक अब भी निश्चित रूप से बता पाने में असमर्थ हैं कि ज्वालामुखी कब फटेगा और विस्फोट कितना शक्तिशाली होगा. लेकिन इतना निश्चित है कि जैसे जैसे समय बीत रहा है मेरापी पर्वत से निकल रहे धुँए के घने और काले बादलों के साथ-साथ संकट के बादल भी छा रहे है.