बुधवार, 10 मई, 2006 को 21:30 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन के अटॉर्नी जनरल लॉर्ड गोल्डस्मिथ ने कहा है कि ग्वांतानामो बे में अमरीकी बंदी शिविर को बंद कर देना चाहिए.
ख़बरें हैं कि उन्हें इस बात को लेकर गंभीर संदेह है कि 'दुश्नन लड़ाकों' को अनिश्चित काल तक के लिए क़ैद में रखना सही या वैध है.
उधर अमरीका ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए क़ैदियों को ग्वांतानामो बे बंदी शिविर में रखे जाने के फ़ैसले को सही ठहराया है.
क्यूबा में अमरीका के इस बंदी शिविर को लेकर ये पहली आपत्ति नहीं है और प्रताड़ना की ख़बरों के बीच इससे पहले भी कई बार इसे बंद करने मांग हो चुकी है.
क़ानूनी रुप से सही
इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने ग्वांतानामो बे को 'असंगत' ठहराया था.
लेकिन लॉर्ड गोल्डस्मिथ ने इसके विरोध में कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा है कि ये बंदीगृह अन्याय का प्रतीक बनता जा रहा है और इसका अस्तित्व स्वीकार नहीं किया जा सकता.
इससे पहले ब्रिटेन की ओर से इतने साफ़ शब्दों में ग्वांतानामो बे को बंद करने की मांग नहीं हुई थी. हालांकि ये बात कहते हुए गोल्डस्मिथ ने साफ़ कर दिया कि ये उनकी अपनी राय है, ब्रिटेन सरकार की कोई नीति नहीं है.
उन्होंने लंदन में दिए गए एक भाषण में कहा, "आंतक के ख़िलाफ़ युद्ध में तो थोड़ा लचीलापन हो सकता है लेकिन न्याय के सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता."
उन्होंने कहा कि ग्वांतानामो बे को बंद करना राजनीतिक और क़ानूनी रुप से सही होगा.
ब्रिटिश अधिकारियों का कहना है कि लॉर्ड गोल्डस्मिथ की ये मांग बुश प्रशासन पर दबाव बनाने की कोई कोशिश नहीं है.
लेकिन वे मानते हैं कि अमरीका में भी ग्वांतानामो बे को लेकर लोगों की राय बदल रही है जिसके चलते राष्ट्रपति बुश भी कह चुके हैं कि वे चाहते हैं कि वे इस बंदी शिविर को बंद होता देखना चाहते हैं.
अमरीकी प्रतिक्रिया
अमरीका ने गोल्डस्मिथ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्वांतानामो बे बंदी शिविर को औचित्यपूर्ण ठहराया है.
अमरीकी विदेश विभाग ने कहा है ग्वांतानामो बे को बंद कर देने से बेहतर कुछ नहीं हो सकता लेकिन इसका अस्तित्व इसलिए है क्योंकि अमरीका एक अलग तरह का युद्ध लड़ रहा है और उसके दुश्मन अलग तरह के हैं.
विदेश विभाग के प्रवक्ता सीएन मैककॉर्मैक ने कहा कि अमरीका दुनिया भर का जेलर नहीं होना चाहता.
प्रवक्ता ने कहा कि कई देशों से इस समझौते के बाद कि उन्हें वापस 'युद्धभूमि' में नहीं लौटने दिया जाएगा, कई क़ैदियों को उनके मूल देशों में वापस भेज दिया गया है.
प्रवक्ता ने कहा है कि क़ैदियों को लेकर अमरीका अपने क़ानूनों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पूरी तरह पालन करता है.
बीबीसी संवाददाता जोनाथन बील का कहना है कि ब्रिटेन की ओर से आए इस ताज़ा दबाव से अमरीकी नीति में बदलाव की संभावना नहीं है, कम से कम निकट भविष्य में तो नहीं ही है.