सोमवार, 08 मई, 2006 को 03:05 GMT तक के समाचार
सहायता एजेंसी 'सेव द चिल्ड्रन' का कहना है कि लाइबेरिया में सहायता एजेंसियों के लोग और शांति सैनिक सहायता के बदले लड़कियों का शारीरिक शोषण कर रहे हैं.
उसका कहना है कि जबकि कुछ समय पहले अंतरराष्ट्रीय जगत ने यह वादा किया गया था कि इसको रोका जाएगा.
सहायता एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि आठ साल तक की लड़कियों का खाने मुहैया कराने के बदले शारीरिक शोषण किया जा रहा है.
सहायता एजेंसी का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक, सरकारी अधिकारी और यहाँ तक कि अध्यापक इन लड़कियों के सामने सेक्स की मांग रखते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि गृह युद्ध से विस्थापित हुए लोगों के गाँव लौटने पर यह शोषण अधिक होता है. लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधियों ने ऐसे मामलों की जाँच का आश्वासन दिया है.
चार साल पहले संयुक्त राष्ट्र ने शरणार्थी शिविरों में शारीरिक शोषण की घटनाओं के बाद ऐसे मामलों को लेकर सतर्कता बरतने का आश्वासन दिया था.
'सेव द चिल्ड्रन' ने ऐसे ही शिविरों में रह रहे 300 लोगों से बात की और पाया कि यह शोषण व्यापक रूप से अब भी चल रहा है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि जवाब देनेवाली आधी से अधिक लड़कियाँ इससे प्रभावित थीं.
बीस वर्षीय एक नवयुवती ने बीबीसी को बताया कि विश्व खाद्य कार्यक्रम के एक कार्यकर्ता से सेक्स के लिए उस पर दबाव डाला गया.
सहायता एजेंसी का कहना है कि स्कूल का डर दिखाकर या फिर अच्छे अंकों के प्रलोभन के बदले अध्यापक भी शारीरिक शोषण करने से नहीं चूकते हैं.
'सेव द चिलड्रन' की ब्रिटेन की मुख्य कार्यकारी जैस्मिन विटब्रेड ने कहा,'' ऐसे नहीं चल सकता. इसकी तुरंत रोकथाम की जानी चाहिए.''