बुधवार, 03 मई, 2006 को 15:52 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन के गृह मंत्री चार्ल्स क्लार्क ने कहा है कि विदेशी अपराधियों को देश से बाहर निकालने के लिए एक नया क़ानून लाए जाने पर विचार किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों के लिए सज़ा काट रहे अपराधियों को सज़ा खत्म होने पर इस क़ानून के तहत वापस उनके देश भेज दिया जाएगा.
पिछले दिनों ब्रिटेन में कई विदेशी अपराधियों को सज़ा खत्म होने पर रिहा कर दिया गया था और उन्हें वापस उनके देश नहीं भेजा गया था और इस मामले पर विपक्षी दल गृह मंत्री चार्ल्स के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.
बीस वर्षीय सोमालियाई नागरिक मुस्ताफ़ जमा का मामला ब्रितानी गृह मंत्रालय के लिए आलोचना का मुख्य कारण बन गया है.
मुस्ताफ़ ने एक आपराधिक मामले में कारावास की सज़ा पूरी की जिसके बाद उन्हें सोमालिया भेजने पर विचार किया गया लेकिन ऐसा हुआ नहीं और वह ब्रिटेन में ही बने रहे.
इसके बाद जब महिला पुलिसकर्मी की हत्या में शामिल होने के एक अन्य मामले में उनकी तलाश शुरू हुई तो यह बात सामने आई कि वे सज़ायाफ़्ता अपराधी रहे हैं लेकिन उन्हें सोमालिया वापस नहीं भेजा गया है.
अब पुलिस कह रही है कि मुस्ताफ़ गिरफ़्तारी से बचने के लिए कहीं छिप गए हैं.
अब विपक्षी दल गृह मंत्री चार्ल्स क्लार्क से पूछ रहे हैं कि आख़िर मुस्ताफ़ को ब्रिटेन में क्यों बने रहने दिया गया.
इसके जवाब में चार्ल्स क्लार्क ने कहा है कि वे विदेशी अपराधियों के मामले में गृह मंत्रालय की नीतियों में व्यापक फेरबदल की योजना बना रहे हैं.
साथ ही, उन्होंने स्वीकार किया कि विदेशी अपराधियों को देश से निकालने के मामले में सरकारी तंत्र नाकाम रहा है.
माना जा रहा है कि इसकी दो वजहें हो सकती हैं, एक तो ये कि किसी व्यक्ति को दोबारा सोमालिया भेजना मानवाधिकारों की दृष्टि से कठिन फ़ैसला है, दूसरे ये कि गृह मंत्रालय को लगा होगा कि मुस्ताफ़ को उनके देश वापस भेजना ज़्यादा मुश्किल और महँगा विकल्प है.
असली वजह चाहे जो भी रही हो, गृह मंत्रालय की कामकाज की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल तो उठे ही हैं.
अब गृह मंत्री क्लार्क उन एक हज़ार से अधिक मामलों पर ध्यान केंद्रित करेंगे जिनमें आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की वजह से विदेशी नागरिकों ने कारावास की सज़ा काटी है, लेकिन उन्हें उनके देश वापस नहीं भेजा गया है.
माना जा रहा है कि देश से अवांछित विदेशी व्यक्तियों को निकालने संबंधी ब्रितानी सरकार की नीति और सख़्त बनाई जाएगी.
गृह मंत्री का प्रस्ताव यही होने वाला है कि जेल की सज़ा काट चुके हर विदेशी नागरिक को उसके देश वापस भेज दिया जाए.
लेकिन इस बदलाव को लागू करना आसान नहीं होगा और मानवाधिकार संगठन इस बदलाव को लेकर पहले से ही शंकित हैं, उनका कहना है कि दुकान से सामान की चोरी करने वाले और हत्या करने वाले व्यक्ति के साथ एक जैसा सुलूक उचित नहीं होगा.
कुल मिलाकर अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि विपक्ष की आलोचना झेल रहे गृह मंत्री चार्ल्स क्लार्क ऐसा क्या विकल्प सुझाते हैं जिस पर आम सहमति बन सके.