मंगलवार, 02 मई, 2006 को 09:14 GMT तक के समाचार
कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफ़न हार्पर ने बीस साल पहले हुए कनिष्क विमान हादसे की जाँच के आदेश दिए हैं.
हार्पर ने संसद को बताया कि मामले की पूरी जाँच तुरंत प्रभाव से शुरू की जा रही है.
जून 1985 में एयर इंडिया का विमान कनिष्क कनाडा से भारत की उड़ान के दौरान बम धमाके में ध्वस्त हो गया था. इस दुर्घटना में विमान पर सवार सभी 329 यात्रियों की जान चली गई थी.
कनाडा के ही नागरिक रिपुदमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागड़ी को काफ़ी लंबे जले मुक़दमे के बाद मार्च 2005 में बरी कर दिया गया था.
इन लोगों को बरी किए जाने से कनिष्क विमान बम काँड से प्रभावित परिवारों में भारी नाराज़गी देखी गई थी.
उन परिवारों ने माँग की थी कि यह जाँच कराई जाए कि इतने लंबे और महंगे मुक़दमे से आख़िर क्या हासिल हुआ और उनके लिए तो इसका फ़ैसला बहुत ही निराशाजनक रहा.
दबाव
फ़ैसले के बाद से विमान हादसे का शिकार बने लोगों के परिजन सरकार पर मामले की जाँच के लिए दबाव बनाए हुए थे.
कनाडा की पिछली सरकार ने जाँच की माँग का विरोध किया था और बाद में सीमित जाँच के लिए तैयार हुई थी. लेकिन अब नए प्रधानमंत्री स्टीफ़न हार्पर ने पीड़ितों से अपनी सहानुभूति दिखाई है.
संसद को अपने संबोधन में हार्पर ने कहा किक जाँच का उद्देश्य है भविष्य में कनाडा में आतंकवादी कार्रवाइयों को होने देने से रोकना और एयर इंडिया के विमान में बम फटने से जुड़े अनुत्तरित सवालों के जवाब ढूँढना.
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ट जज की अध्यक्षता वाली जाँच समिति 1980 के दशक में और आज कनाडा में मौजूद आतंकवाद विरोधी व्यवस्थाओं का जायज़ा लेगी.
जाँच समिति कनाडा की पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों से भी पूछताछ करेगी.
कनिष्क विमान हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों ने जाँच की घोषणा का स्वागत किया है.