सोमवार, 24 अप्रैल, 2006 को 01:41 GMT तक के समाचार
अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि अरबी टेलीविज़न चैनल अल ज़जीरा पर प्रसारित ओसामा बिन लादेन का टेप असली है.
इस ऑडियो टेप में आरोप लगाया गया है कि हमास को अलग थलग करने की पश्चिमी देशों की रणनीति दिखाती है कि वे इस्लाम के ख़िलाफ़ धर्मयुद्ध छेड़े हुए हैं.
दूसरी ओर अमरीकी राष्ट्रपति के प्रवक्ता स्कॉट मैक्लेलन का कहना था कि इससे साफ़ है कि अल क़ायदा नेता दबाव में हैं और छुपते फिर रहे हैं.
लेकिन राष्ट्रपति बुश के राजनीतिक विरोधियों ने इस मुद्दे को लेकर उनपर निशाना साधा है.
विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह टेप इस बात की याद दिलाता है कि बुश प्रशासन ओसामा बिन लादेन को पकड़ने में असफल रहा है.
डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख नेता जेन हरमन ने अमरीका प्रशासन पर इराक़ पर असफल रहने का आरोप लगाया है.
एक और डेमोक्रेटिक सदस्य एडवर्ड कैनेडी ने कहा कि इराक़ पर हमले के कारण आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई से ध्यान बटा है.
डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रहे जॉन कैरी का कहना था कि अल क़ायदा नेता की मौजूदगी रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड के इस्तीफ़े की पर्याप्त वजह है.
हमास की प्रतिक्रिया
हालांकि फ़लस्तीनी सरकार का नेतृत्व कर रहे चरमपंथी संगठन हमास ने अल क़ायदा की आलोचना से अपने को अलग कर लिया है.
हमास के प्रवक्ता सामी अबू ज़ुहरी ने कहा है कि वो पश्चिम के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं और हमास की विचारधारा अल क़ायदा की विचारधारा से मेल नहीं खाती है.
लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ देशों की रणनीति से पश्चिम और इस्लामी देशों के बीच तनाव पैदा हो रहा है.
फ़लस्तीनी चुनावों में हमास की जीत के बाद अमरीका, यूरोपीय संघ और इसराइल ने फ़लस्तीनी सरकार को आर्थिक मदद बंद कर दी है.
इन देशों का कहना है कि जब तक हमास हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ता और इसराइल को मान्यता नहीं देता तब तक फ़लस्तीनी प्राधिकरण की मदद नहीं की जाएगी.
एक और टेप
इस टेप में अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन ने आरोप लगाया है कि फ़लस्तीनी संगठन हमास को अलग-थलग करने के प्रयास साबित करते हैं कि पश्चिमी देश इस्लाम के ख़िलाफ़ धर्मयुद्ध छेड़े हुए हैं.
उन्होंने अपने समर्थकों से आहवान किया कि वे सूडान के दारफ़ुर क्षेत्र में लंबी जंग के लिए तैयार हो जाएँ क्योंकि वहाँ संयुक्त राष्ट्र अपना शांति दल तैनात करने की तैयारी कर रहा है.
अल क़ायदा नेता ने अपने समर्थकों से अनुरोध किया कि वे पश्चिमी देशों में बनी चीज़ों का बहिष्कार करें क्योंकि उन्होंने डेनमार्क में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून छापे जाने की घटना के बाद उसको समर्थन दिया था.
इससे पहले जनवरी में अल क़ायदा का एक टेप जारी किया गया था जिसमें अमरीका के साथ 'संघर्षविराम' की बात की गई थी और इसके लिए कुछ शर्तें रखी गई थीं.