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शनिवार, 22 अप्रैल, 2006 को 23:08 GMT तक के समाचार

मलिकी के नेतृत्व में इराक़ मे नई सरकार

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने नई गठबंधन सरकार बनाने पर इराक़ी नेताओं की सहमति का स्वागत किया है और कहा है कि इराक़ में लोकतंत्र की बहाली की दिशा में यह सहमति मील का पत्थर साबित होगी.

इराक़ में कई महीनों के गतिरोध के बाद शिया गठबंधन एक जाने माने शिया नेता जवाद अल मलिकी को प्रधानमंत्री बनाने पर सहमत हुआ है जो इब्राहिम जाफरी का स्थान लेंगे.

इससे पहले संसद में चुन कर आए अन्य सुन्नी अरब दलों और कुर्द पार्टियों ने निवर्तमान प्रधानमंत्री इब्राहिम जाफरी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाए जाने का विरोध किया था.

इराक़ी राष्ट्रपति जलाल तालाबानी ने मलिकी से सरकार का गठन करने को कहा है. मलिकी के पास कैबिनेट के गठन के लिए एक महीने का समय है.

जवाद अल मलिकी का जीवन परिचय

मलिकी को ऐसी कैबिनेट बनानी है जिसे संसद में समर्थन मिल सके.

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि मलिकी के नाम पर विभिन्न दलों के बीच बनी सहमति आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में भी एक जीत है और यह फ़ैसला अमरीकी सैनिकों की इराक़ से वापसी का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है.

प्रधानमंत्री मनोनीत होने के बाद अपने पहले नीतिगत भाषण में मलिकी ने कहा कि वो धार्मिक और नस्ली भेदभाव से ऊपर उठकर एक ऐसी सरकार बनाने की कोशिश करेंगे जिसमें इराक़ी समाज के सभी तबकों का प्रतिनिधित्व हो सके.

जलाल तालाबानी को संसद ने शनिवार को हुए सत्र में फिर से राष्ट्रपति चुन लिया था. अपने चुनाव के बस कुछ ही देर बाद जलाल तालाबानी ने जवाद अल मलिकी को सरकार बनाने का न्यौता दे दिया.

दिसंबर 2005 में चुनाव होने के बाद इराक़ी संसद का यह सिर्फ़ दूसरा सत्र था जिसमें नए स्पीकर महमूद मशहदानी का भी चुनाव हुआ. मशहदानी एक सु्न्नी अरब हैं.

हिंसक घटनाएं

इराक़ में एक ओर जहां मलिकी को सरकार बनाने के लिए बुलाया गया वहीं दूसरी ओर देश भर में हिंसक घटनाओं में कोई कमी नहीं आई.

शनिवार को हुई हिंसा में बग़दाद के दक्षिण में हुए एक ज़बर्दस्त विस्फोट में पांच अमरीकी सैनिक मारे गए.

संवाद समिति एपी के अनुसार ब़ग़दाद के उत्तर में मुकदादियाह शहर के बाज़ार में दो बम फटे जिसमें दो इराक़ी नागरिकों की मौत हो गई.

उधर ब़ग़दाद के आसपास दस ऐसे शव बरामद किए गए हैं जिनके शरीर पर गोलियों के घाव हैं.

इराक़ी और अमरीकी अधिकारियों का मानना है कि शिया, सुन्नी और कुर्दों के मेलजोल वाली सरकार के गठन से देश में सुन्नियों के नेतृत्व में चल रहे सशस्त्र संघर्ष में कमी आ सकेगी.