बुधवार, 19 अप्रैल, 2006 को 11:39 GMT तक के समाचार
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के मुक़दमे में अब ध्यान उनके दस्तख़तों पर है जिनके बारे में अदालत में बताया गया है कि कुछ लोगों को मौत की सज़ा का आदेश देने वाले दस्तावेज़ों पर किए गए थे.
लेकिन असल ध्यान इस मुद्दे पर है कि क्या उन दस्तावेज़ों पर किए गए दस्तख़त क्या वाक़ई सद्दाम हुसैन के दस्तख़त से मिलते हैं.
बुधवार को जैसे ही मुक़दमे की सुनवाई शुरू हुई तो जज ने हस्तलिपि के विशेषज्ञों की एक रिपोर्ट पढ़कर सुनाई जिसमें कहा गया है कि मौत की सज़ा देने वाले दस्तावेज़ों पर जो दस्तख़त किए गए हैं वे सद्दाम हुसैन के असली दस्तख़त से मेल खाते हैं.
लेकिन बचाव पक्ष के वकीलों ने इस रिपोर्ट का ग़लत बताया है. उन्होंने सद्दाम हुसैन के दस्तख़तों की वास्तविकता की जाँच के लिए 'निष्पक्ष विशेषज्ञ' नियुक्त किए जाने की माँग की.
ग़ौरतलब है कि सद्दाम हुसैन और सात अन्य अभियुक्तों पर 1982 में दुजैल गाँव में 148 शियाओं को मारने के आदेश देने के आरोप में मुक़दमा चल रहा है.
अभियोजन पक्ष ने सद्दाम हुसैन पर आरोपों को सही साबित करने के प्रयासों के तहत हज़ारों दस्तावेज़ अदालत में पेश किए हैं जबकि बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा है कि वे दस्तख़त नक़ली हैं.
बग़दाद में बीबीसी संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड्स का कहना है कि जब हस्तलिपि के विशेषज्ञों ने यह कहा कि उन दस्तावेज़ों पर सद्दाम हुसैन के असली दस्तख़त हैं तो यह बहुत अहम लम्हा था.
मुख्य जज रऊफ़ अब्दुल रहमान ने सद्दाम हुसैन के दस्तख़त की प्रामाणिकता की जाँच के लिए विशेषज्ञों को दो दिन का अतिरिक्त समय दिया था.
जज ने बुधवार को अदालत की कार्यवाही की सुनवाई ही विशेषज्ञों की रिपोर्ट सुनाते हुए की. उन्होंने घोषणा की, "विशेषज्ञों ने इन दस्तावेज़ों और सद्दाम हुसैन के दस्तख़त की जाँच-पड़ताल की है और वे प्रामाणिक पाए गए हैं."
इन दस्तावेज़ों पर कुछ अन्य अभियुक्तों के दस्तख़त भी प्रामाणिक बताए गए हैं. अलबत्ता ये दस्तावेज़ आम लोगों के लिए नहीं जारी किए गए हैं.