शुक्रवार, 14 अप्रैल, 2006 को 20:33 GMT तक के समाचार
ईरान के आध्यात्मिक नेता आयतुल्ला ख़ामनई ने कहा है कि ये मुस्लिम देशों का कर्तव्य है कि वे फ़लस्तीनी लोगों की सहायता करें.
हमास के नेतृत्व वाले फ़लस्तीनी प्रशासन के लिए आर्थिक सहायता जुटाने के लिए हो रहे तीन दिन के सम्मेलन में बोलते हुए ख़ामनई ने कहा कि मुस्लिम देशों को मानना चाहिए कि फ़लस्तीन की समस्या उनकी अपनी समस्या है.
उल्लेखनीय है कि यूरोपीय संघ और अमरीका ने हमास के नेतृत्व वाली फ़लस्तीनी सरकार को आर्थिक सहायता यह कहते हुए बंद कर दी है कि हमास ने हिंसा त्यागने से मना कर दिया है और इसराइल को भी मान्यता नहीं दे रहा है.
एक ओर ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने ईसराइल को मध्यपूर्व के दूसरे देशों के लिए ख़तरा बताया है.
तो दूसरी ओर फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री इस्माईल हानिया ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा है कि नई फ़लस्तीनी सरकार पश्चिमी देशों के आर्थिक और कूटनीतिक दबाव में नहीं आने वाली है.
अपील
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता ख़ामनई ने सम्मेलन में अपने भाषण में पश्चिमी देशों पर खुले प्रहार किए.
उन्होंने कहा है कि पश्चिम का उदार लोकतंत्र एक ज़हर की तरह है.
ख़ामनई ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति के नेतृत्व वाला वैश्विक साम्राज्यवाद मुस्लिम देशों के लिए ख़तरा बन गया है.
उन्होंने मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे फ़लस्तीनी लोगों की त्रासदी के प्रति उदासीन न रहकर उनकी हर समस्या को अपनी समस्या के रुप में ही देखना होगा.
ख़तरा
उधर ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने इसराइल को मुस्लिम देशों के लिए ख़तरा बताया है.
उन्होंने इसराइल को एक सड़ा हुआ पेड़ बताते हुए कहा कि एक ही आँधी में ये पेड़ धराशाई हो जाएगा.
उन्होंने कहा, "यहूदी जनसंहार पर तो शंकाएँ हैं लेकिन पिछले साठ सालों में फ़लस्तीनी नागरिकों का जो जनसंहार हुआ है उस पर कोई शक नहीं है."
अहमदीनेजाद ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में, जैसा कि पश्चिम का आरोप है, यहूदियों के ख़िलाफ़ हुए अत्याचार की क़ीमत फ़लस्तीनी नागरिक क्यों चुकाएँ.