गुरुवार, 13 अप्रैल, 2006 को 14:25 GMT तक के समाचार
मध्य अफ्रीकी देश चाड में विद्रोही हिंसा का सीधा संबंध पड़ोसी देश सूडान में चल रही दारफुर की समस्या है.
ज़्यादातर अफ्रीकी देशों की तरह सूडान और चाड में ऐसे क़बीले हैं जो दो देशों के बीच में बँटे हुए हैं. जब दारफ़ुर में लोगों ने सूडान की केंद्रीय सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह किया तो उस विद्रोह को बलपूर्वक कुचलने की कोशिश की गई, ऐसे में विद्रोहियों ने पड़ोसी देश चाड के अपने भाई-बंधुओं से मदद ली.
इसके अलावा दारफ़ुर के लगभग दो लाख लोग चाड में शरणार्थी बनकर पहुँच गए. चाड के राष्ट्रपति इदरीस डेबी का आरोप है कि सूडानी सरकार अपनी दुश्मनी निकाल रही है और उन्हें सत्ता से हटाने की माँग करने वाले विद्रोहियों को भड़का रही है.
वैसे उनका यह आरोप सही भी हो सकता है क्योंकि चाड के विद्रोही सूडान की ही तरफ़ से चलकर चाड की राजधानी तक पहुँचे हैं.
चाड आख़िर कैसा देश है और जो विद्रोही राजधानी पर धावा बोल रहे हैं उससे किस तरह का ख़तरा पैदा हो सकता है?
लगभग एक करोड़ की आबादी वाले उत्तरी अफ्रीकी देश चाड के ज़्यादातर लोग अपनी जीविका कृषि से ही चलाते हैं जबकि इस देश में ऊपजाऊ ज़मीन कम और रेगिस्तान अधिक है. हालाँकि चाड के पास खनिज भंडार की कमी नहीं है, यहाँ सोना तो है ही यूरेनियम भी है लेकिन बुनियादी सुविधाओं का काफ़ी अभाव है.
संयुक्त राष्ट्र के आकलन के मुताबिक़ चाड दुनिया के पाँच सबसे पिछड़े देशों में से एक है. यहाँ फ्रांसीसी और अरबी भाषा मुख्य रूप से बोली जाती है, इस देश में मुसलमान और ईसाई धर्म के मानने वाले लोग रहते हैं, ज़्यादातर लोग अलग-अलग कबीलों में बँटे हैं.
चाड में मौजूदा राष्ट्रपति ने बहुदलीय लोकतंत्र की स्थापना 2001 में की थी और मई में देश में लोकतांत्रिक चुनाव होने हैं और अगर विद्रोह बेक़ाबू हुआ या विद्रोही राष्ट्रपति को हटाने में सफल रहे लोकतंत्र ख़तरे में पड़ सकता है.
वैसे भी 1996 में तख़्तापलट करके राष्ट्रपति इदरीस सत्ता में आए थे और देश में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी नहीं हैं, देश कई क़बीलों में बँटा है और गृह युद्ध भड़कने की आशंका से कोई इनकार नहीं कर सकता. ऐसे में दुनिया के एक निर्धन देश की ग़रीब जनता के लिए संकट और बढ़ जाएगा.
चाड ने कुछ ही वर्षों पहले पेट्रोलियम का निर्यात करना शुरू किया है, लोग इस विद्रोह को तेल की संपदा से भी जोड़कर देख रहे हैं.
सूडान, लीबिया और नाइजीरिया से घिरे इस देश में समृद्धि की आशा जागी है क्योंकि यहाँ पेट्रोलियम निकालने का काम शुरू हो गया है और चाड अब पेट्रोलियम के निर्यातकों देशों की जमात में शामिल हो गया है.
चाड में जारी उथलपुथल की जड़ें इस नई उपलब्धि में भी हैं, विद्रोहियों और पड़ोसी देशों की नज़र चाड की इस प्राकृतिक संपदा पर न हो, ऐसा नहीं हो सकता. चाड में अंदरूनी राजनीति में भी तेल की भारी भूमिका है.
पहले सरकार ने एक क़ानून बनाकर वादा किया था कि तेल के निर्यात से होने वाली आय का उपयोग निर्धनता दूर करने के लिए किया जाएगा लेकिन हाल ही में राष्ट्रपति इदरीस डेबी ने इस क़ानून को पलट दिया है जिससे विश्व बैंक और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन नाराज़ हैं.
विद्रोहियों को भी लग रहा है कि तेल की संपदा पर राष्ट्रपति अपना पूरा नियंत्रण जमा रहे हैं इसलिए उन्हें रोकना ज़रूरी है.