बुधवार, 12 अप्रैल, 2006 को 16:20 GMT तक के समाचार
स्टीवन ईक
बीबीसी संवाददाता, लंदन
अमरीका के बाद अब रूस सरकार ने भी ईरान से कहा है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्द्धन का काम रोक दे.
यूरेनियम संवर्द्धन करने की ईरान की घोषणा
छह महीने पहले की बात है जब रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लेवरोव ने कहा था कि ईरान के विरूद्ध कड़े क़दम उठाना फ़ायदे का सौदा नहीं रहेगा.
उन्होने ज़ोर देकर कहा था कि ये मानने का कोई आधार नहीं है कि ईरान अन्तरराष्ष्ट्रीय स्तर पर की गयी प्रतिबद्धता का उल्लंघन करके यूरेनियम संवर्द्धन की प्रक्रिया शुरू करेगा.
रूस में परमाणु ऊर्जा एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने ईरान से नज़दीकी रिश्ते कायम किये थे और उनका विश्वास था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही है.
लेकिन कुछ ही दिनो में स्थिति पूरी तरह बदल गयी है.
ईरान में एक कट्टरवादी नेता सत्ता में है और मध्यस्थता के लिये यूरोपीय देशों की और से किए जा रहे प्रयास असफल सिद्ध हुए है.
नाकाम प्रयास
समझौते के लिये रूस ने एक प्रस्ताव रखा था कि यूरेनियम संवर्द्धन की संवेदनशील प्रक्रिया ईरान की और से रूस में करायी जाए.
रूस का मानना था कि इस मुद्दे पर जारी गतिरोध को उसके प्रयासों से ही ख़त्म किया जा सकता है हालांकि पश्चिमी जगत के विश्लेषको ने रूस को आगाह किया था कि ये इतना आसान नहीं होगा. और कुछ ऐसा ही हुआ जब ईरान ने इस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया.
उसके बाद से ऐसा लग रहा है कि रूस ने इस पूरे मामले पर कडा रूख अपनाने का निर्णय लिया है.
एक ओर रूस सैनिक कारवाई की संभावना से इनकार कर रहा है वहीं दूसरी और रूस के प्रतिरक्षा मंत्री ने ईरान को चेतावनी दी है कि इस मुद्दे पर मास्को का रूख अन्य देशों से अलग नहीं है.
जिस तरह से रूस और और ईरान के संबन्धो में नज़दीकी बढी थी उसमे ये देखना दिलचस्प होगा कि परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर मास्को से निपटने में कितनी दूर तक जाता है.