रविवार, 09 अप्रैल, 2006 को 12:17 GMT तक के समाचार
इराक़ सरकार ने मिस्र के राष्ट्रपति होसनी मुबारक की ये टिप्पणी देने के लिए निंदा की है कि इराक़ में गृह युद्ध छिड़ सकता है.
इराक़ी प्रधानमंत्री इब्राहीम अल जाफ़री ने कहा कि टेलीवीज़न पर दिए गए मिस्र के राष्ट्रपति के बयान से इराक़ में विभिन्न समुदाय आहत हुए हैं.
उन्होंने कहा कि इराक़ी सरकार इस बयान से हैरान है. होस्नी मुबारक के बयान की निंदा करते समय कुर्द और सुन्नी समुदाय के राजनेता भी इब्राहीम अल जाफ़री के साथ थे.
होस्नी मुबारक ने कहा था कि इराक़ में हिंसा से गृह युद्ध छिड़ सकता है और यह इराक़ की सीमा के पार भी फैल सकता है.
राष्ट्रपति मुबारक का कहना था कि यदि अमरीकी सेना हटी तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी.
एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा था कि इराक़ के शिया समुदाय पर ईरान के असर ने स्थिति को और जटिल बना दिया है.
उनका कहना था कि शिया समुदाय अपने देश से कहीं अधिक ईरान के प्रति वफादार रहता है.
'स्थिति गंभीर'
ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने इराक़ की स्थिति को 'बेहद गंभीर' बताया है. पर साथ ही उन्होंने कहा कि शिया नेताओं ने संयम का परिचय दिया है और इसके चलते ही गृह युद्ध नहीं छिड़ा है.
इराक़ में आंतरिक सुरक्षा मामलों के मंत्री ने भी शनिवार को कहा था कि उनके देश में अघोषित गृह युद्ध चल रहा है.
इस बीच इराक़ के शिया गठबंधन के नेता राष्ट्रीय सरकार के गठन में आया गतिरोध दूर करने के लिए बातचीत कर रहे हैं.
नई सरकार में प्रधानमंत्री इब्राहीम अल जाफ़री को ही बनाया जाए या नहीं, इस विवाद को सुलझाने के लिए शिया नेताओं ने एक समिति का गठन किया है.
ये समिति सोमवार को अपनी रिपोर्ट देगी.
गतिरोध
प्रधानमंत्री पद पर इब्राहीम अल जाफ़री का नामांकन कुर्द और सुन्नी समुदाय के साथ सरकार गठन की बातचीत में बड़ा मुद्दा बना हुआ है.
अब शिया समुदाय के लोग भी इब्राहीम अल जाफ़री से नाम वापस लेने के लिए कह रहे हैं.
अमरीका और ब्रिटेन चाहते हैं कि इराक़ का प्रधानमंत्री कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे सबका समर्थन प्राप्त हो.
शुक्रवार को बग़दाद में एक मस्जिद पर हुए हमले में 90 लोग मारे गए थे.
माना जा रहा है कि सरकार गठन में हो रही देरी के चलते इराक़ में जातीय हिंसा में तेज़ी आई है.