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शुक्रवार, 07 अप्रैल, 2006 को 02:05 GMT तक के समाचार

अमरीका की 'इराक़ी चरमपंथियों' से वार्ता

इराक़ में अमरीकी राजदूत ज़ल्मै ख़लीलज़ाद ने इस बात की पुष्टि की है कि अमरीकी अधिकारियों ने ऐसे गुटों से बात की है जिनका संबंध सुन्नी चरमपंथियों से है.

बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में ख़लीलज़ाद ने कहा कि इस बातचीत का असर हुआ है और अमरीकी सैनिकों पर हुए हमलों में कमी आई है.

लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वे उन लोगों से बात नहीं करेंगे जो सद्दाम हुसैन समर्थक और आतंकवादी हैं और जो सभ्यता के ख़िलाफ़ जंग छेड़े हुए हैं.

विस्तार से दिए एक इस इंटरव्यू में ख़लीलज़ाद ने चेतावनी दी कि इराक़ के सामने गृह युद्ध का ख़तरा अब भी बना हुआ है.

उन्होंने कहा कि अगर अमरीका के साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे रोकने के लिए हरसंभव कोशिश नहीं करता है तो इसके नतीजे सिर्फ़ मध्य पूर्व तक ही सीमित नहीं रहेंगे.

उन्होंने कहा कि अमरीकी अधिकारी कुछ ऐसे गुटों के साथ बात कर रहे हैं जिनके संबंध सुन्नी चरमपंथियों से भी हैं.

आवश्यकता

मगर साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि लड़ाकुओं से निबटने के लिए अभी और क़दम उठाने की ज़रूरत है. उनका यहाँ इशारा शिया पार्टियों के नियंत्रण वाले सशस्त्र गुटों की ओर था.

ज़ल्मै ख़लीलज़ाद अमरीकी राष्ट्रपति बुश का निकट सहयोगी हैं और माना जाता है कि तीन वर्ष पहले सद्दाम हुसैन को पद से हटाने की रणनीति उन्होंने ही तैयार की थी.

उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि वे दूसरे अमरीकी अधिकारियों के मुक़ाबले नाकामियों को भी जल्द स्वीकार कर लेते हैं.

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इराक़ में जातीय आधार पर गृह युद्ध भड़कने की आशंका बरक़रार है.

उन्होंने आगाह किया है कि अगर कुर्दों और अरबों के बीच की खाई नहीं पाटी गई तो एक व्यापक क्षेत्रीय टकराव का ख़तरा पैदा हो सकता है.

उनका कहना है कि इसीलिए इराक़ के लोगों को अपने मतभेद भुलाने होंगे चाहे इराक़ पर अमरीकी हमले के बारे में उनका नज़रिया कुछ भी हो.

ख़लीलज़ाद ने पहली बार यह भी स्वीकार किया है कि इराक़ में सुन्नी विद्रोही गुटों से संबंधित लोगों से अमरीकी अधिकारी बातचीत कर रहे हैं, उनका कहना है कि इसके सकारात्मक परिणाम भी निकले हैं.