मंगलवार, 04 अप्रैल, 2006 को 11:22 GMT तक के समाचार
इराक़ में पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पर मुक़दमा चला रही अदालत ने कहा है कि उन पर 1980 के दशक में कुर्दों के जनसंहार के आरोपों में भी मुक़दमा चलाया जाएगा.
सद्दाम हुसैन और छह अन्य लोगों पर लोगों के मारने के अभियान, लोगों को गिरफ़्तार करने, उन्हें देश से बाहर भेज देने और संपत्ति नष्ट करने जैसे नए आरोप लगाए गए हैं.
उस घटना को कुर्दों के ख़िलाफ़ अनफल अभियान के नाम से जाना जाता है.
मानवाधिकार गुटों का कहना है कि इस अभियान में एक लाख 80 हज़ार नागरिकों की जानें गईं थीं.
उल्लेखनीय है कि सद्दाम हुसैन और सात अन्य लोगों के ख़िलाफ़ 1982 में दुजैल गाँव में 148 शियाओं की हत्या के आरोप में मुक़दमा पहले से ही चल रहा है.
कहा जाता है कि इन लोगों की कथित हत्या सद्दाम हुसैन पर जानलेवा हमला करने के बाद हुई थी.
जाँच करने वाले जज रायद जूही ने कहा कि सद्दाम हुसैन और कुछ अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोप एक अन्य जज को सौंपे गए हैं.
यह जज सबूतों की जाँच-पड़ताल करके मुक़दमा शुरू करने की तारीख़ की घोषणा करेगा.
गंभीर अपराध
अनफल को कुर्दों के ख़िलाफ़ सद्दाम हुसैन के शासनकाल का सबसे गंभीर अपराधों में से एक माना जाता है.
मानवाधिकार संगठन मानते हैं कि हवाब्जा में ज़हरीली गैस से पाँच हज़ार कुर्दों की हत्या भी अनफल का हिस्सा था.
हालांकि अदालत के प्रवक्ता रायद जूही ने कहा है कि हलाब्जा के लिए मुक़दमा अलग से चलाया जाएगा.
उन्होंने कहा, "अनफल के हज़ारों पीड़ित लोगों को गिरफ़्तार किया गया, प्रताड़ित किया गया और विस्थापित होने के लिए मजबूर किया गया."
"लोगों को अलग-अलग बंदीगृहों में रखा गया, उनके गाँव उजाड़कर जला दिए गए."
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जनसंहार के मामले में अलग से मुक़दमा चलाने का फ़ैसला अदालत ने हज़ारों दस्तावेज़ देखने, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सुनने और सामूहिक क़ब्रें देखने के बाद किया है.
इस मामले में सद्दाम हुसैन के साथ उनके चचेरे भाई अली हसन अल मजीद यानी केमिकल अली भी अभियुक्त हैं.