मंगलवार, 04 अप्रैल, 2006 को 23:55 GMT तक के समाचार
इराक़ के प्रधानमंत्री इब्राहिम अल जाफ़री ने कहा है कि अमरीका और ब्रिटेन उन्हें दबावपूर्वक पद छोड़ने को नहीं कह सकते.
उन्होंने कहा है कि उन्हें लोकतांत्रिक ढंग से प्रधानमंत्री चुना गया है और इराक़ की जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए.
जाफ़री ने ये बातें ब्रिटेन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र 'द गार्डियन' को दिए एक साक्षात्कार में कही हैं.
अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस और ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ की पिछले सप्ताहांत में हुई इराक़ यात्रा के बाद ये जाफ़री का पहला बयान है.
ये दोनों ही नेता अचानक ही इराक़ पहुँचे थे और दोनों ने इराक़ी नेताओं पर जल्द से जल्द राष्ट्रीय सरकार के गठन के लिए दबाव बनाने की कोशिश की थी.
इससे पहले राइस और स्ट्रॉ ने साफ़ करने की कोशिश की थी कि वे इराक़ के मामले में दखल नहीं दे रहे हैं.
अमरीका की विदेश मंत्री कॉडोलीज़ा राइस ने कहा है कि इराक़ का अगला प्रधानमंत्री एक ऐसा शक्तिशाली नेता होना चाहिए जो देश को एकजुट कर सके.
पर साथ ही उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री कौन होगा ये तय करना दूसरे देशों की सरकारों का काम नहीं है.
उधर ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा है कि इराक़ में शिया समुदाय को देश के प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार नामांकित करने का अधिकार है.
पद छोड़ने का दबाव
इस बीच उपराष्ट्रपति अदेल अब्दुल महदी ने भी कहा है कि इब्राहिम अल जाफ़री को पद छोड़ देना चाहिए.
महदी शिया गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं में से हैं जिन्होंने जाफ़री से पद छोड़ देने को कहा है.
इससे पहले शिया गठबंधन के एक निर्दलीय नेता क़ासिम दाउद ने कहा था कि अगर इब्राहिम अल जाफ़री नई सरकार में प्रधानमंत्री पद की दौड़ से हट जाते हैं तो इससे इराक़ी लोगों की एकजुटता बनी रहेगी.
माना जा रहा है कि इब्राहिम अल जाफ़री की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी ही अब इराक़ में गठबंधन सरकार के गठन में सबसे बड़ी बाधा है.
इराक़ में शिया दलों को कुर्दों और सुन्नियों के साथ मिलकर एक गठबंधन सरकार बनानी है. फ़रवरी में जाफ़री को शिया गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया था.
सरकार का गठन
इराक़ में पिछले साल 15 दिसंबर को चुनाव हुए थे लेकिन अब तक सरकार का गठन नहीं हो पाया है.
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री पद पर विवाद के चलते सरकार के गठन में बाधा आ रही है. वर्तमान प्रधानमंत्री इब्राहिम अल जाफ़री शिया गठबंधन की एक प्रमुख पार्टी के नेता हैं.
सुन्नी और कुर्द राजनेता कई बार माँग कर चुके हैं कि इब्राहिम अल जाफ़री प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार से अपना नाम वापस लें.
इन नेताओं का कहना है कि इब्राहिम अल जाफ़री दूसरे समुदायों के प्रति भेदभाव करते हैं.
इराक़ में हुए चुनावों में शिया गठबंधन युनाइटेड इराक़ी एलायंस को सबसे अधिक सीटें मिली थीं लेकिन उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिला था.
कुर्द गठबंधन को 53, कुर्दिस्तान इस्लामिक यूनियन को पाँच और दो सुन्नी पार्टियों को 55 सीटें मिली थीं. इनके अलावा इराक़ी नेशनल लिस्ट के भी 25 उम्मीदवार विजयी रहे थे.
सरकार के गठन में हो रही देरी से अमरीका और ब्रिटेन की बेसब्री बढ़ती जा रही है.