मंगलवार, 04 अप्रैल, 2006 को 11:33 GMT तक के समाचार
फ्रांस में नए विवादास्पद श्रम क़ानून के विरोध में बुलाई गई आम हड़ताल के दौरान सार्वजनिक परिवहन और हवाई सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है और स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं.
श्रम और छात्र संगठनों ने पाँचवी बार पूरे देश में हड़ताल का आहवान किया है.
एक हफ़्ता पहले चौथी बार ऐसी ही हड़ताल का आहवान किया गया था जब लाखों प्रदर्शनकारी फ़्रांस की सड़कों पर उतरे थे. हड़ताल बुलाने वाले नेताओं ने अपने समर्थकों से वैसा ही शक्तिप्रदर्शन करने का अनुरोध किया है.
श्रम संगठनों की चिंता है कि नए क़ानून का इस्तेमाल कर मालिक युवाओं का शोषण करेंगे. नए क़ानून में प्रावधान है कि 26 साल से कम उम्र वाले युवा जब नौकरी की शुरुआत करते हैं तो दो साल के अभ्यासकाल के दौरान उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है.
लेकिन सरकार का कहना है कि नए क़ानून से यूवाओं में बेरोज़गारी घटेगी और श्रम बाज़ार और लचीला होगा.
उधर राष्ट्रपति ज़्याक शिराक़ ने वादा किया है वे नए क़ानून को कुछ 'नरम' बनाने की कोशिश करेंगे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि श्रम संगठन को ऐसा आभास हो रहा है कि उनकी जीत संभव है और उनका मानना है कि यदि पहले जैसे एक और शक्ति प्रदर्शन होता है तो सरकार हार मान सकती है.
राजधानी पेरिस में चार हज़ार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं ताकि पिछली बार की तरह हिंसक घटनाओं को रोका जा सके.